गजल - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 3 नवंबर 2011

गजल



बतहा बसात सन टौआइत हमर जिनगी
मेंहक बरद सन थौआईत हमर जिनगी

बिपदाक टाल हमर जिनगीक दालान पर
सूखक कबाउछ में हौआइत हमर जिनगी

झहरैत मेघ थिक सब हमर मोनक मनोरथ
डालिक अरहुल सन मौलाइत हमर जिनगी

नोरक डबरा हमर जिनगीक आँगन में
काठक असरा सन घुनाइत हमर जिनगी

नेहक आतुर हमर जिनगीक भोर सांझ
सिनेहक सपना में बौआइत हमर जिनगी

स स्नेह
विकाश झा