कुण्डली

कुण्डली


बोल वचन हुअए नीक, बूझि बाजी जँ बात

गुम्म रहनाइए ठीक, हुए जँ नमहर जाल

हुए जँ नमहर जाल, लेत ओ लप दऽ भीतर

हल्ला बनि जाएत, नै अछि जँ बेर उचित पर

सुनू हमर ई बात, बात होइए अनमोल

ऐरावत कहि जाय, कहू नै ओल सन बोल

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