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कोशिक कान्ह प ठाढ़ भ
कमला आ बेलौंती में
डूब लगबइए छि !
जेठ में तपैत अई शहर में
मिथिलाक स्मृतियें सौं
शीतल होइत छि !

माघ पूसक जार में
दाएयक बोरसी आ बाबाक घुर
गुमारक अनुभूति दैत अईछ !


भादबक झपसी में
बोराक घोघी ,माथ परक सूप
उप्नैनिया मेघडंबर सौं
सैद्खन सुखले रहैई छि !

बसंतक आगमन सौं
महकैत महुआ
गमकैत मज्जर
कोइलिक मिसिरिया बोल,
हरियरका नुआ मैं पियरका साडी सौं
तन मन सजले रहैत अइछ..!!!!

स स्नेह -विकाश झा

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