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पूनम मंडल - दिल्लीमे गूंजल मैथिली कविता
देशक राजधानी दिल्लीमे साहित्यिक, सांस्कृतिक आ सामाजिक संस्था 'मिथिलांगन" द्वारा आयोजित कवि गोष्ठीमे मैथिली कविता आ गीत खूब गूंजल। अवसर छल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित डॉ. ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म" क जयंतीक। आयोजन रविवार, 11 सितम्बर, 2011 केँ राजघाट स्थित सत्याग्रह मंडपमे कएल गेल।

विशाल मैथिली कवि गोष्ठीमे मैथिली भाषाक युवासँ लऽ कऽ मूर्धन्य कवि अप्पन विशिष्ट कविताक पाठ कऽ उपस्थित श्रोताकेँ मंत्रमुग्ध कऽ देलन्हि। कवि गोष्ठीक अध्यक्षता पटनासँ पधारल वरिष्ठ हिन्दी-मैथिली कवि डॉ. ललित कुमुद आ संचालन प्रख्यात कवि-नाटककार कुमार शैलेन्द्र केलनि। ऐ कवि सम्मलेनमे कविता पाठक आरंभ युवा कवि विनीत उत्पल अप्पन दू टा कवितासँ केलखिन। एक्कर बाद युवा कवि किशन कारीगर, स्तुति नारायण, विनीता मल्लिक, रमण कुमार सिंह, गीतकार मानवर्धन कंठ, शारदा नन्द दास 'परिमल", 'तुरंता" लेल जानल जाएबला वरिष्ठ कवि रवींद्र लाल दास 'सुमन", रवी-वीन्द्र-महेंद्रक जोड़ीक रवींन्द्र नाथ ठाकुर, कुमार शैलेन्द्र आ शेफालिका वर्मा अप्पन कविताक पाठ पढ़लनि। ब्रह्मदेव लाल दासक मोन ठीक नै छल तेँ ओ उपस्थित नै भऽ सकलाह आ हुनकर कविताक पाठ हुनकर पुतोहु सरिता दास केलनि।

समारोहक आरंभ प्रसिद्ध मैथिली गायक सुंदरमक नेतृत्वमे मिथिलांगन सांस्कृतिक दलक स्वागत गानसँ भेल। तकर बाद डॉ. शेफालिका वर्मा आ डॉ. ललित कुमुद मणिपद्मजीक व्यक्तित्व आ कृतित्व केँ लोकक आगू राखलखिन। समारोहमे मैथिली भाषाक विशिष्ट साहित्यकार रमानंद रेणु, मार्कण्डेय प्रवासी, फजलुर रहमान हासमी हिनका सभक निधन केँ लऽ कऽ शोक व्यक्त सेहो कएल गेल। संगे-संग दिल्ली उच्च न्यायालय लग भेल बम विस्फोटमे घायल भेल आ मारल गेल निर्दोष लोकक आत्माक शांति लेल दू मिनटक मौन सेहो राखल गेल।
कवि गोष्ठीमे शामिल सभटा कविकेँ मिथिलांगनक स्मृति चिन्ह देल गेल आ हुनका सभसँ संस्थाक सचिव अभय कुमार लाल दास आभार व्यक्त केलनि।

रमण कुमार सिंह

विनीत उत्पल

किशन कारीगर




रवीन्द्रनाथ ठाकुर

शेफालिका वर्मा

स्तुति नारायण

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  1. Delhi me aayojit pahil maithili kavya sammelan bad neek rahal tahi lel sabh kavi aaor mithilangan ke sampoorn team evam shrotagan ke sadar aavar aaor sadar naman.barishat sahitykar rabindranath thakur, Dr. shefalika verma, Dr. gangesh gunjan, suman jee , Dr.Kumud jee evem aamantatrit sabh kavi loknik samaksh kavya path karbak saubhagya hamra bhetal ehi lel ek ber fer mithilangan ke dhanyabad aa aabhar. sundram jee neek gyan prastut kelain. ehina aano tham kavya goshthi, sanskritik karyakarm hoyat rahat etbak ham kamna kaya rahal chhi...jai mithila jai maithil.

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