गद्य कविता - मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

गद्य कविता

वाद



भूख की होइत छैक। यथार्थ की कल्पना ? अथवा एकरा एना कहिऔ जे भूखकेँ कोन वादमे बन्हबै ?

यथार्थवाद
तदर्थवाद
अभिव्यंजनावाद
नवचेतनावाद
वा की ??????????????.......