मैथिल करू अपन मात्रिभुमिक रक्षा --अप्पू मिथिला - मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 23 अगस्त 2011

मैथिल करू अपन मात्रिभुमिक रक्षा --अप्पू मिथिला




जागु जागु यौ मैथिल युवा जागु
सुनु मिथिला माएक विह्वल पुकार
सोनित सं भिजल माएक आँचर
छाती पैर हुनक चलल हरक फार
सुनु हृदय विदारक माएक चीत्कार
क्रूर शाषक  रहे मिथिलाक खतरा
ब्रिटिश केलक मिथिलाक चिर दू कतरा
बनौलक त्रिपक्षय सुगौली संधिक पत्रा
नेपालमें पईरगेल आधा मिथिलाक टुक्रा
बिहार नेपालमे मिथिला भेल अछि विभक्त
जागु जागु यौ मैथिल मिथिला माएक भक्त
कोना खेलब यौ मैथिल मिथिलाक कोरामें 
माएक आँचर डुबल अछि नोरक अश्रुधारामें
बिहार में मैथिलके देख्बैय बिहारी लाठी
नेपालमे देखाबैय मैथिलके पहाड़ी खोर्नाठी
केहन इ दुर्भाग्य बनल छि भाई भाई अनचिन्हार 
लहू सं लतपत भेल अछि मिथिलाक मुहार
१९१६ के सन्धिमें मिथिला बाँटल गेल
आधा मिथिला नेपालमे लीज पैर चैलगेल
जनकपुरधाम अछि नेपालक अंग तोडू इ भ्रम
२०१६ में भरहल अछि सन्धिक समझौता ख़त्म 
जागु जागु मैथिल करू अपन मात्रिभुमिक रक्षा
सब करी एक मिथिला एक प्रदेशक प्रतीक्षा
जय मिथिला जय मैथिल ///////////////////////

रचनाकार--अप्पू मिथिला