चलैतछी डगैर पैर शुद्ध मन वचन कर्म सं
गबैतछी गीत हम अपन ईमान धर्म सं
वैदेहीक जन्मभूमि राजर्षि जनक के गाम
मिथिलाक हम वासी वास हमर जनकपुरधाम
जग में सुन्दर अछि इ नाम जय जय जय मिथिलाधाम
मिथिलाक जन जन मैथिल मथिली हमर भाषा
पुनह पुनह जन्म ली मिथिलेमें इ हमर अभिलाषा
उत्तर हिमगिरी हिमालय दक्षिण पावन पतित गंगा
कोशी गंडक जनकपुर चाहे बसु दरभंगा
इ समस्त भूमि अछि मिथिला जय जय जय मिथिलाधाम
दया धर्म हृदय में राखी मिथिलाक जन जन मैथिल
सौहार्द्य वातावरण सृजन करी मिथिलाक जन जन मैथिल
जातपातक भेदभाव सं दूर रही मिथिलाक मैथिल
हिन्दू करैय मुस्लिमके सलाम मुस्लिम हिन्दुकें प्रणाम
डोम घर दहिचुरा खेलैथ पाहून राम जय जय जय मिथिलाधाम
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

sundar
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