सभ भाईकें बोलाबैय अपन बोहीन सीता
घुमु अमेरिका लन्दन चाहे रूस जापान यौ
भेटत नै जगमे यी सुन्दर मिथिलाधाम यौ
स्वर्ग सं सुन्दर अछि अपने जनकपुर नगरिया
चले चलू मीता राजा जनक केर दुवरिया
उर्वर्भूमि अछि अपने मिथिलाधाम यौ
गम गम गम्कैय खेत में बासमती धान
सगरो भेटैय माछ मखान आर पान यौ
गाछ गाछ पैर झुलैय मालदह आम
चले चल मीता बोहीन सीताक गाम यौ
जगमें महान हमर मिथिलाधाम यौ
परदेश छोइड चलू अपन गाम यौ मीता
सभ भाई के बोलाबैय अपन बोहीन सीता
पाहून हमर मर्यादा पुरोषोतम राम यौ
विद्यापति वाचस्पति मिथिलाक शान यौ
मुर्ख बनैय एकही राईतमें ईठाम विद्वान यौ
कालिदास हमर भेलाह समूचा जगमे महान यौ
चले चल छोइड सौदी कतार दुबई कुबेत रे
श्रम सं सीचब मीता अपने बारी आर खेत रे
रंगविरंगक साग सब्जी उब्जत खईब भईर पेट रे
हिया जुडैतो माए बाबु बोहीन भौजीक स्नेह रे
चले चल मीता अपन बोहीन सीताक गाम रे
जगमे महान हमर अपने मिथिलाधाम रे
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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