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सदरे आलम "गौहर"
व्याख्याता:-एस.एम.जे.कालेज खाजेडीह, ग्राम पो:- पुरसौलिया.मधुबनी


गजल
दाम एतय सभ चीजक देब' पड़ै छै।
अधिकारक लेल झग्गड़ '' पड़ै छै।

गज भरि जमीन जौँ कौरव नहि देब' चाहै।
पाँडव के फेर लोहा लेब' पड़ै छै।

कर्बला केर खिस्सा ' दुनिया जानै छै।
धर्मक खातिर शीश कटाब' पड़ै छै।

झग्गड़ झँझट मानलौँ नीक नहि होइ छै मुदा।
जीब' खातिर ईहो '' पड़ै छै।

"
गौहर" साधु '' लए चाहैत अछि मुदा।
दुर्जन केँ जे पाठ पढ़ाब' पड़ै छै।

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