अहां रहैत छि परदेस पिया@प्रभात राय भट्ट - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 22 जून 2011

अहां रहैत छि परदेस पिया@प्रभात राय भट्ट


अहां रहैत छि परदेस पिया,
एसगर लागेना मोरा जिया,
ओ सजनजी लागेना मोरा जिया.....२

जागल आईख सपना देखै छी,
नितदिन अहांक बाट तकैत छी,
अहांक देखैला फटेय हमर हिया,
ओ बलम जी लागेना मोरा जिया....२

रिमझिम वर्षीय सावनके बदरा,
केकरा संग सुतब लाईगक पजरा,
आईग लागल देहमें पिया जी मोरा,
ओ पिया जी लागेना मोरा जिया.....२

अहां विनु सुना लगैय पलंगिया,
गाम आबिजाऊ बलम जनकपुरिया,
बुझाऊ प्यास मिलनके जुडाऊ हिया,
ओ सजन जी लागेना मोरा जिया......२

देखू पिया उमरल जैइय हमर जवानी,
जेना सावनमें उमरैय कमला कोशीके पानी,
जुवानी भरेय हुकार अहां आबैछी नए किया,
ओ बलम जी लागेना मोरा जिया.........२

देखू सजनजी हम सोलह श्रृंगार केने छी,
अहिंके सूरत सैद्खन  हम ध्यान देने छी,
पंख लगा उईर आऊ घुईर फेर नै जाऊ,
ओ सजनजी अहां बिनु लागेना मोरा जिया....2

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट