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(चित्र: वरुण घाटी नेपाल, सौजन्य विकीपीडिया-Creative Commons Attribution 3.0 Unported license )


१.
हाइकू


चढ़ाउतार
नै नड़हा फौदार
चाही प्रकृति


तागि प्रकृति
ताकैले भेलौं पार
सुखल पात

२.
टनका/ वाका

ई फूल फल
चढ़ैत जाइ आगाँ
कम होइए
उनटि देखी फेर
लगमे कम दूरे बेशी

३.
शेनर्यू

रंग छाड़ल
पहाड़ आर गाछ
मुदा जीवन

४.
हैबून

झझायल रंग कतेक वर्णक। बच्चाक किताबोसँ बेशी चमकैए ई प्रकृति, फूल, पात, बाट आ अकास। आ एकरा सभकेँ तँ छोड़ू ई बरफ, जे रेगिस्ताने ने छी, बालुक बदला बरफ। मुदा नै अछि ऑक्सीजन आ नहिये फूल-पात। मुदा एकर सेहो देखियौ शान। जइ रस्तासँ अबै छलहुँ से ओतेक कहाँ चमकै छलए। जखन ओइ प्रकृतिक लग छलहुँ तँ कहाँ ओकर रूप निङहारि पाबै छलहुँ। कियो दूरसँ देखैत होएत तँ निङहारि पबैत हएत हमरो, प्रकृतिक बीचमे हमहूँ प्रकृति बनल हएब। मुदा ऐ शिखरपर आबि जे सनगर लगैए ई प्रकृति।


गाछ भेल छै
असगरुआ बौआ
पात भेल छै
खिलौना प्रकृतिक
शिखर देखि

मुदा आब ऐ शिखरपर एलाक बाद लगैए जे बेकारे एलहुँ एतऽ। ऐ शिखरकेँ ओइ ठामसँ देखै छलहुँ तँ कतेक सुन्नर लगै छल ई शिखर। मुदा शिखरपर एलाक बाद आब तँ वएह गाम नीक लगैए। तुलना तखने ने हएत जखन गामक प्रकृतिकेँ शिखरसँ देखबै। गामसँ शिखर आ शिखरसँ गाम। मुदा लिलसासँ हाइ रे हाइ। आब चलै छी शिखरक ओइ पार। देखै छी ओइ दिसुका लोक समाज। दूरसँ लगैए दुनू कातक गाम नीक, तराउपड़ी। मुदा ओइ कातक गामसँ शिखर ओतेक सुन्नर लागत जतेक ऐ पारक गामसँ लगैए।


नै ठाढ़ होउ
चलू चली घुरैले
बनिजार छी
लोकक बीचमे छी
जाइत घुरैत छी

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