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वनेश्वरी (बिना) माता, दरभंगा जिला के भंडारिसम और मकरंदा गाँव केरी बीच मे छथी,

ई कहानी बहुत पूरण अछी जखन अग्रेज के शाशन छल त अग्रेज हिनका स् बियाह करऽ चहेत चलेनी तही लकऽ हिंकार बाबूजी(वाने) बहुत दुखी रहेत छलखिन ई बात जखन(बिना) केरी मालूम परिलेन तऽ बिना कहलखिन की बाबूजी आहा चिंता ज़ूनी करू हम ही आहा के चिंता के कारण छी ने,


एक दिन बिना अपन भतीजा के कोरा मे लकऽ बैशल छली तहीने अग्रेज अपन शेना के लकऽ अबी गेल,

ई देख बिना गाँव के बाहर एक टा पोखेर या त्लिखोरी या ओतऽ चली गेली और ओही पोखेर मे जा कऽ कूद गेली आ अपन प्राण दऽ देलखीन कुछ साल बीतलक बाद ई पाठक नाम केरी परीवार मे स्वप्न देलखीन की हम ई पोखेर मे छी हमरा निकालु ई बात सुनी क सब हका-बका रही गेलाह और ओही पोखेर में सऽ निकले के विचार में जुट गेला और गाँव केरी पांच टा ब्राम्हण गेला और ओही पत्थर के प्रतिमा के बाहर निकलेथ जे की ओ प्रतिमा ४.५" छल, और ओही वानेश्वरी के प्रतिमा के एक टा पीपर गाछ के निचा राखल गेल बहुत दिन तक ओही गाछ के निचा में पूजा भेल, ग्राम चनोर के रजा लाक्ष्मेषर के पुत्र नहीं होए छलनी तऽ ओ ओही वानेश्वरी माँ के दरबार में गला और मन्नत मंग्लाह और कह्खिन जे हमर मनोकामना अगर पूरा होयत तऽ हम मंदिर बनायब कुछ दिनक बाद हुनका पुत्र भेलनि और ओ मंदिर बनेलेथ आब माँ वानेश्वरी ओही मंदिर में रहेत छथि.

कहल जय या जे एते जे कियो मन्नत मांगे या ओकर मन्नत पूरा होयत या,
आब एत रामनवी और दुर्गापूजा सेहो बहुत धूम-धाम सऽ मनायल जय या,



नाम - अजय ठाकुर (मोहन जी)
पिता - नरेश ठाकुर
श्रेस्ट भाई - विजय ठाकुर (पप्पू)
ग्राम/पोस्ट - भाल्पत्टी,
जिला - दरभंगा,
बिहार - ८४७२३९

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