गजल - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 18 अप्रैल 2011

गजल

नजैर बचा क नजैर सँ देखइ छि ,
देखि ने आहाँ डेरा क देखइ छि !

जखनो देखइ छि मुदा नबे लगइ छि,
तैं नित नजैर सँ नुका क देखइ छि !

सोझा मैं अबितौं बाटे तकैई छि ,
नजैर में अहींक छाहीं देखइ छि !

नजरे सौं सबटा खेरहा करैईत छि,
चप्पे मुदा हम सबटा देखइ छि !

आहाँ रूपक किताबो पढ़ई छि,
जुनी सोंचू गलत नजर सौं देखइ छि!

सनेहक आपेक्षि
विकाश झा