3

हे यए जनकपुरवाली भौजी सुनु नए कने,

कहिया स: हम एकटा बात छि मोनमें धयने,

अहाँक बोहीन लगैय दुतियाँक चाँद सन,

कोमल कोमल देह हुनक लगैय मखान सन,

लाल लाल ठोर हुनक लगैय मीठा पान सन,

अहाँक बोहीन भौजी लगैय बड़ा बेजोर,

हुनक रूप देख मोन में हमरा उठल हिलोर,

अन्हार घर में बोहीन अहाँक करिय इजोर,

गगनमे जेना चम् चम् चमकईय चानचकोर,

देख्लौ अहाँक बोहीन के हम जहिया स:

पढाई में मोन लगैय नए हमर तहियाँ स:

मुश्किल स भरहल अछि जिनगीक निर्वाह,

बढ़ाऊ बात आगू करादिया हमर विवाह,

अंग अंगमें सजायेब हुनका हिरा मोती के गहना,

खन खन खन्कौती ओ हाथमें नेपालक कंगना,

अहाँ बोहीनके डोली चढ़ा लायेब अपन अंगना,

ओ बनती हमर सजनी हम बनब हुनक सजना,

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मिथिला दैनिक क' समाचार ईमेल द्वारा प्राप्त करि :

Delivered by Mithila Dainik

  1. अहाँक बोहीन भौजी लगैय बड़ा बेजोर,
    हुनक रूप देख मोन में हमरा उठल हिलोर,
    अन्हार घर में बोहीन अहाँक करिय इजोर,
    गगनमे जेना चम् चम् चमकईय चानचकोर,
    prabhat ji hila deliyai

    उत्तर देंहटाएं

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

 
#zbwid-2f8a1035