दुल्हे पीयोलक जहर@प्रभात राय भट्ट - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 6 अप्रैल 2011

दुल्हे पीयोलक जहर@प्रभात राय भट्ट

दुल्हे पीयोलक जहर@प्रभात राय भट्ट
व्याह क्याक पिया घर गेलौं,

मोन में सुन्दर सपना सजेलौं,

सासुर घरके स्वर्ग समझलौं,

डोली चैढ पिया घर एलौं,

हर्षित मन केकरो नए देखलौं,

गिद्ध नजैर स सब हमरा देखलक,

झाड़ू बारहैन स स्वागत केलक ,

बाप किया नए देलकौ तिलक,

जरल परल जूठकुठ खियोलक,

सपना सबटा भेल चकनाचूर,

सास भेटल बड़ा निठुर,

ठनका जिका ठंकैय ससूर,

बात बात में चंडाल जिका

आईंख देख्बैय भैंसुर,

जेकरा साथै लेलौं सात फेरा

ओहो रहैय मर स दूर,

जाधैर बाप देतौने रुपैया ,

सूत बिछाक आँगनमें खटिया,

कल्पी कल्पी केलों गोरधरिया,

कतय स बाप हमर देत रुपैया,

बाबु यौ हम अहाँक राजदुलारी,

छालों हम म्याके प्यारी ,

विधाता लिखलन केहन विधना,

किया रचौलक एहन रचना,

नरक स बतर जीवन हम जीबैत छि,

आईंखक नोर घुईट घुईट पिबैत छि,

दूल्हा मगैछौ फटफटिया आ सोनाके चैन,

नए देभि त छीन लेतौ हमर सुखचैन,

बेट्टीक हालत देख बाप धैल्क हाथ माथ,

चैन फटफटिया लक आएब हम साथ

सासूर घुइर जो बेट्टी रख बापक मान,

सपना भेल सबटा चकनाचूर,

सास सासूर भेटल बड़ा निठुर,

मालजाल जिका बन्ह्लक देवर,

ननद उतारलक गहना जेवर,

मुग्ड़ी स माईर माईर

बडकी दियादिन देखौलक तेवर,

पिजड़ा में हम फसल चीडैया,

कटल रहे हमर पंख पंखुड़िया ,

पकैर धकैर दुल्हे पियोलक जहर,

छटपट हम छटपटएलौं कतेक प्रहर,

पत्थरके संसारमें कियो

नए सुनलक हमर चीत्कार,

प्राण निकलैत हम मुक्त भेलौं,

छोइड दलों यी पापी संसार,

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट