हमरा बिसैर गेलौं - प्रभात राय भट्ट - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 24 मार्च 2011

हमरा बिसैर गेलौं - प्रभात राय भट्ट

हमरा स की भूल भेलई जे अहाँ हमरा बिसैर गेलौं,
सब केर प्रीतम गाम येलई अहाँ किया नए येलों,
यौ पिया अहाँ हमरा बिसैर गेलौं...........२


अहाँ के कोना बिसरबई धनि अहीं छि हमर जान,
अहाँ के जौं बिसरबई त निकेल जेतई हमर प्राण,
ये धनि अहांके कोना बिसरबई ............२


सावन वितल भादो वितल,वितल पूस माघ क जारा,
मईर मईरक जिन्दा रहलौं बड मुस्किल भेल गुजरा,
यौ पिया अहाँ हमरा बिसैर गेलौं ............२


सावन में रिमझिम रिमझिम बदरा येना बरसल,
अहांक स्नेह आ प्रीत लेल सजना देह हमर तरसल ,
यौ पिया अहाँ हमरा बिसैर गेलौं .............२


पुर्निमो केर राईत में हमरा लगैय अन्हार ययौ,
माघफागुन येना बितईय जेना जोवन भेल पहार यौ,
सब केर पिया गाम एलई अहाँ किया नए येलौ,
ययौ पिया अहाँ हमरा बिसैर गेलौं ...........२


काम काज में दिन बीत जैइय मुदा राईत नए कटईय,
असगर मोन नए लगईय अहिक सुरतिया याद अबैय,
छि हम मजबूर भेल सजनी अईब केर परदेस में ,
अहाँ विन जिबैछी कोना बुझु विशेष में ........२


जाईग जाईग करैत छि प्रातः उठैत छि खाली हात,
केकरा स:कहू अपन मोन क बात के बूझत हमर हालत ,
अहि स:हमर यी निर्सल जिनगी केर हिया जुडायत,
सजनी अहा ला लक आइब मोनभैर प्रेमक सौगात..२


रचनाकार:प्रभात राय भट्ट