दूटा आर गजल- डॉ. नरेश कुमार ‘वि‍कल’ - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 1 जनवरी 2011

दूटा आर गजल- डॉ. नरेश कुमार ‘वि‍कल’

गजल-1


तन भि‍ंजा कए मन जराबए आबि‍ गेल साओन केर दि‍न।

वि‍रह-वेदन तान गाबए आबि‍ गेल साओन केर दि‍न।

खेलि‍ कऽ बरसात अप्‍पन वस्‍त्र फेंकल सूर्यपर

चानकेँ सेहो लजाबए आबि‍ गेल साओन केर दि‍न।

मधुर फूही भरल अमृत सँ प्‍लावि‍त ई धरा

पान महारकेँ कराबए आबि‍ गेल साओन केर दि‍न।

ई बसातक बात की हो अनल-कन-रंजि‍त बहए

मोनकेँ पाथर बनाबए आबि‍ गेल साअोन केर दि‍न।

खोहमे खोंताक खूजल द्वारि‍पर वि‍धुआएल सन

वि‍रहि‍णीकेँ बस डराबए आबि‍ गेल साअोन केर दि‍न।

बाध हरि‍यर, बोन हरि‍यर हरि‍यरे चहुँ दि‍स छै

धूरसँ आङन सुखाबए आबि‍ गेल साअोन केर दि‍न।

बांसुरीपर टेरि‍ रहलै के एहन रस-रोग राग

भेल भुम्‍हूरकेँ पजारए आबि‍ गेल साअोन केर दि‍न।

सि‍मसि‍माहे नूआ-सन झपसीमे लागए सहज-मन

सतलकेँ आओरो सताबए आबि‍ गेल साअोन केर दि‍न।




गजल- 2



शेषांशपर रोदन करू वा गीत उदि‍त भानपर।

कि‍न्‍तु आफत अाबि‍ पहुँचल मान और सम्‍मानपर।

दीप जम्‍बूद्वीप केर नि‍त्त अकम्‍पि‍त भए जरए

यएह सोचब ि‍थक कठि‍न अनीति‍ केर दोकानपर।

भेल वृद्धि‍ ज्ञानमे, वि‍ज्ञानमे, संधानमे

जन्‍म दर केर बात की वृद्धि‍ उत्‍थानपर।

कि‍न्‍तु नैति‍कताक अवनति‍ आचरण, सम भावमे

देश हि‍त केर बात तँ चलि‍ गेल कोठीक कान्‍हपर।

देश गांधी, बुद्ध केर रहि‍ गेल ने सुभाष केर

देश ई नाचए सदति‍ घोटाला सबहक तानपर।

आब वि‍चरण कए रहल नरभक्षी दोसर वेशमे

छैक कनि‍को ने दया एे नेना केर मुसकानपर।