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आब मानि जाउ ने।

(एकटा हास्य रेडियो नाटक)

परिचय पात:-

1 राजेश - नायक।
2 कमला - नायिका-राजेशक पत्नी उर्फ पाही वाली।
3 मनोहर - राजेशक लंगोटिया दोस्त।
4 विमला - मनोहरक पत्नी उर्फ ठारही वाली।
5 नीलू - विमलाक सहेली।
6 सोनी - नीलूक सहेली।
7 मदन - दोस्त ।

पटकथा लेखक:- किशन कारीग़र।

संपर्क सूत्र:- 011-32670787




नोट:-भारतीय कॉपीराइट अधिनियम के तहत सर्वाधिकार लेखक कें अधिन सुरक्षित। लेखकक लिखित अनुमतिक बिना नाटकक कोनो अंशक प्रसारण व प्रकाशन नहि केल जा सकैत अछि।


। प्रथम दृश्य।

ध्वनी संगीत

कमलाः- (कनेक तमसाएल भाव में) मारे मुहॅ धकेए आब बाट तकैत-तकैत मोन अकछा गेल। हिनका किछू अनबाक लेल नहिं कहलियैन कि एकटा आफद मोल लए लेलहॅू।

तखने राजेशक प्रवेश।
राजेश:- (दारूक निशा में बरबराइत) हे यै पाही वाली कतए छी यै एम्हर आउ ने यै पाही वाली।

कमला:- (खूम खिसियाएल भाव मे) लगैत अछि जेना पूरा अन्धरा बजारे खरीदने आबि रहल छथि। तहि द्वारे अन्हराएल छथि।

राजेशः- हे यै पाही वाली अहॉ जूनी खिसियाउ एकबेर हमर गप सुनू ने।

कमलाः- हम कि खाक सुनू अहॉ के तए हमर कोनो फिकिरे नहि रहैए।

राजेशः-( निशा में मातल गबैत अछि) भिजल ठोर अहॉके।

कमलाः- हे दैब रै दैब अहॉक एहेन अवस्था देखि तए हमर ठोर मुहॅ सुखा गेल आ अहॅा कहैत छी जे भिजल अछि।

राजेशः- अहॉ फुसियाहीं के खंउजा रहल छी गीत सुनू ने। प्यासल दिल ल..ल हमर।

कमलाः-( खउंजा के) हे भगवान एतेक पीबलाक बादो अहॉके पियास लगले अछि तए हैए लिअ घैला मेहक ठंढ़ा पानि।

राजेशः- (हॅंसैत बरबराएत अछि) अहॅू कमाले कए रहल छी पहिने गीत सुनि लियए ने।
राजेशः- कियो हमरा संगे भिंसर तक रहतै तकरा हम करबै खूम प्यार ओ...हो...ओ हो...हो...ओ..हो...हो।

कमलाः- आब कि खाक प्यार करब । आब एक पहर बाद भिंसरो भए जेतैए।

राजेशः- (गीत गबैत गबैत सूतबाक प्रयास) आ सिटी बजा रहल अछि।
कमला:- हे महादेव एहेन गबैया के नींद दए दिऔय।
राजेशः- आब हयिए हम नानी गाम गेलहॅू आ अहॉ अपना गाम सॅ जलखै नेने आउ।

कमला:- अच्छा आब बूझनूक बच्चा जेंका चुपेचाप कले-बले सूति रहू ने।
राजेश:- ठीक छै पाही वाली जॅं अहॉं कहैत छी तऽ हम सूति रहैत छी मुदा जलखै बेर मे हमरा उठा देब।

राजेश सूति रहैत अछि।

।दृश्य समाप्त।

दृश्य-2 प्रारंभ।

चिड़ैय चुनमून के चूं...चूं कें ध्वनी

कमला:- (राजेश के उठबैत) हे यै आब उठि जाउ ने भिंसर भए गेलैए।
राजेश:- पाही वाली अहॉं ठीके कहैत छी की?

कमला:- ठीके नहिं तऽ की झूठ कनेक अपने ऑंखि सॅ देखू भिंसर भऽ गेलै।
राजेशः- हॅं यै ठीके मे भिंसर भऽ गेलैए अच्छा तऽ आब हम मॉर्निंग वॉक माने घूमि फिरी कऽ अबैत छी।

कमला:- अच्छा ठीक छै त जाउ मुदा जल्दीए घूमी क चली आएब। ताबैत हम चाह बना के रखने रहैत छी।

राजेशः- बेस तऽ आब हम घूमने अबैत छी। ओ के बाई-बाई।

राजेशक घर सॅं प्रस्थान।


पार्क में बातचीत करबाक ध्वनी प्रभाव।

मनोहर:- (दौगि रहल अछि आ हॉफि लैत) भाई आई काल्हि राजेश लंगोटिया देखबा मे नहि आबि रहल अछि।

मदन:- (खैनी चुनेबाक पटपट) से तऽ ठीके मे भाई हमरा तऽ बूझना जाइए जे ओ तऽ सासुर मे मंगनीक तरूआ तोड़ी रहल अछि।

मनोहर:- से जे करैत हुए मुदा भेंट तऽ करबाक चाहि।
मदन:- (हरबड़ाइत) हई ए ए ई लियअ नाम लैत देरी राजेश सेहो आबिए गेल।

दौगल अबैत राजेशक प्रवेश।
मनोहर:- (राजेश के देखैत) ओई-होई हमर दोस कि हाल चाल छौ।
राजेशः- हम तऽ ठीके छी भाई तू अपन कह कि समाचार।

मदन:- राम राम यौ लंगोटिया भाई।
राजेशः- (हॅसैत) आहा हा हा राम राम यौ चिकनौटिया भाई।

मदन:- राजेशक हाल तऽ हमरा सॅं पूछू बेचारा चिंता सॅं सनठी जेंकॉं सूखा गेल।
राजेश:- कि भेलैए एकरा से कहब ने कोनो दुख तकलीफ आफद विपैत।

मदन:- (राजेश स)ॅ हमरा सॅ त निक जे राजेश भाई अपने कहिए दहक तखन इहो बकलेल छौड़ा बूझिए जेतैए।

मनोहर:-( उदास भऽ कें) भाई कि कहियौअ जहिया सॅ ठारही वाली रूसि कें अपना नैहर चैल गेलैए हमरा तऽ एक्को कनमा निक्के नहि लगैत अछि।

राजेश:- किएक तूं भाउजि के मनेलही नहि?
मनोहर:- हं रौ भाई कतबो मनेलियैए मुदा ओ नहि मानलकै।

राजेशः- से किएक एहेन कि भऽ गेलैए जे भाउजी मुहॅ फूलौने ठारही चलि गेलौह।
मनोहरः- हमरा दारू पीबाक हिसक छल एहि द्वारे हमर ठारही वाली सपत देलक मुदा हमर हिसक छूटल ने।

राजेशः-( किछू सोचैत) हमरो पाही वाली हमरा सॅ रूसल रहैत अछि किएक तऽ ओकर फरमाईश जे पूरा नहि केलियै।
मदनः- (खैनी चूनेबाक पटपट अवाज) हें हें हा हा हम तऽ कहैत छी दूनू गोटे अपना-अपना कनियॉ ंके मना लियअ आ झगरे खतम।

मनोहरः- अहॉ ठीके कहलहूॅं मदन भाई। आब हम अपना ठारही वाली के मनाएब।
मदन:- हर हर महादेव तऽ झट सॅं निकालू हमर सवा रूपैया दक्षिणा।

मनोहरः- ओकरा सामने सपत खाएब जे आब हम दारू के मुहॅं नहि लगाएब।
राजेशः- तऽ देरि किएक? चल ने ठारही वाली भाउजी के मनेबाक लेल अंधराठारही चलैत छी।
मनोहरः- ठीके रौ भाई चल। मुदा जाइ सॅ पहिने तूं अपना पाही वाली के फोन कऽ दहि ने।
राजेश:- तूं ठीके कहि रहल छें हम एखने फोन लगबैत छी।

मोबाइल सॅं फोन लगेबाक ध्वनी प्रभाव
स्वर:- महिलाक अवाज़ हेल्लो ।
राजेश:- हम आई घर नहिं आएब। किएक तऽ हम मनोहर संगे ओकर सासुर जा रहल छी।
स्वरः- अहॉं के तऽ एक्को रति हमर फरमाईश मोन नहि रहैए।
राजेशः- पाहि वाली अहॉ जूनि रूसि हम अहॉ लेल किछू ने किछू नेने आएब।
स्वर:-ठीक छै तऽ जाउ मुदा जल्दीए चलि आएब। बाई- बाई।
राजेशः- बेस त बाई-बाई।
फोन कटबाक ध्वनी।

राजेशः- पाही वाली तऽ मानि गेलैए चल आब ठारही वाली के मनबैत छी।
मनोहरः- हॉफैत हं हॅं हं किएक नहि? जल्दी दौगल चल।
मदनः- भ भ भाई हमर द द दक्षिणा।
हॅसैत हॅसैत मनोहर आ राजेशक प्रस्थान।

मदन:- (हॅसि क) ई दूनू गोटे त सासुर चलि गेल त आब हमहू जाइत छी बाबूबरही अपना पंडिताइन के भेंट कए आबि। हें हें हें।

दृश्य -3

लड़की के जोर सॅं हॅसबाक अवाज़
(नीलू आ सोनी दूनू गोटे गीत गाबि हॅसी मजाक करै मे लागल अछि)

नीलूः- गीत गबैत आबि जाउ एके बेर आबि जाउ।
सोनीः- केकरा बजा रहल छीहि गे आ आ आबि जाउ।
नीलू-( मुस्कि मारैत) केकरो नहि तोरा ओझा के।
सोनी:-(गीत गबैत) तऽ कहि ने सोझहा आबि जाउ एक बेर आबि जाउ।

ताबैत मनोहर आ राजेशक प्रवेश।
नीलूः- दूनू गोटे के देखी क) दूल्हा बाबू आबि जाउ एक बेर आबि जाउ।
मनोहर:- अहॉ बजेलहूूॅं आ हम हाजिर। कहू समाचार।

सोनीः- ठीके मे गै बहिना देखही गे एहेन धरफड़िया दूल्हा देखल ने।
नीलूः- प्रणाम यौ पाहुन। रस्ता मे कोनो दिक्कस तऽ नहि भेल ने?

मनोहरः- दिक्कस कि खरंजा आ टूटलाहा पिच पर साइकिल चलबैत काल हार पांजर एक भऽ गेल।
सोनी:- त आब मजा आबि रहल अछि।
राजेशः- मजा तऽ आबि रहल अछि मुदा हमरा भाउजी सॅं भेट करा दितहॅू तए ठीक्के मे मजा आबि जेतैए।

नीलू:- अहॉं के नहिं चिन्हलहूॅं यौ हरबड़िया पाहुन।
राजेशः- हॅंसि क हा हा हा हमरा नहि चिन्हलहूॅ हम अहॉ पाहुनक लंगोटिया दोस राजेश छी।

(सभ गोटे ठहक्का लगबैत)
सोनीः- अहॉं कतेक नीक बजैत छी। चलू ने घूमैए लेल।
नीलूः- हॅ यौ पाहुन चलू चलू गाछी कलम आ खेत पथार सभ देखने अबैत छी।
राजेशः- हॅं हॅं किएक नहि चलू ने तीनू गोटे घूमने अबैत छी।

ठहक्का लगबैत तीनू गोटेक प्रस्थान।

मनोहर:- वाह रे किस्मत। सासुर हमर मुदा मान-दान एक्कर। हाई रे किस्मत के खेल।
तखन गीत गबैत विमलाक प्रवेश।

(गीतक ध्वनी- पिया परदेश सॅ पजेब नेने एब यौ पिया)
विमलाः- आश्चर्य भाव सॅं अ अ अहॉं।
मनोहरः- हॅ अहॉ बजेलहूॅ आ हम हाजिर छी। कहू कुशल समाचार।

विमलाः- (रूसि क बजैत) अहॉं के बजेलक के? जाउ हम अहॉ सॅ नहि बाजब।
मनोहरः- अहूॅं त कमाले करैत छी। देखू तऽ हम अहॉक लेल कि सभ अनने छी।
विमलाः- (आश्चर्य भाव सॅ) क क कि अनने छी हमरा लेले??

मनोहरः- (प्यार सॅ) ट...ट...ट टॉफी।
विमला:- अहॉ के टॉफी छोरी आरो किछू बजार मे नहि भेटल की?
मनोहरः- जिलेबी सिंहारा तऽ किनने छलहॅू अॅहिंक लेल मुदा रस्ते मे भूख लागि गेल तऽ अपने खा लेलहॅू।
विमलाः- (उदास भऽ के) अहॉं के तऽ एक्को रति हमर चिंते नहिं रहैयए।
मनोहरः- चिंता रहैयए तहि द्वारे तऽ आब हम दारू पिअब छोड़ि देलहूॅ।
विमलाः-( अकचका के) ठीके मे
मनोहरः- हॅं हॅं हम सपत खेने छी की आब हम दारू कहियो ने पिअब।
विमलाः- ई त बड्ड निक गप। आब हम किछू फरमाईश करी त?
मनोहरः- (हॅसैत) अहॉं फरमाईश त करू हम पूरा अंधरा बजारे घर उठौने चलि आएब।
तखने निलू सोनी आ राजेशक प्रवेश।
नीलू:- दीदी-दीदी चल ने आई पाहुन संगे बजार घूमने अबैत छी।
मनोहरः- हं हं चलू-चलू देरि भए जाएत आई अहॉं सभ कें अंधरा बजार घूमा दैत छी।

ठहक्का लगबैत सभहक प्रस्थान।



दृश्य-4

बजारक दृश्य बिक्रेता सभ के विभिन्न अवाज़।

बिक्रेताः- घड़ी लऽ लियअ, रेडियो लऽ लियअ।
बिक्रेता:- (डूगडूगी बजबैत) हे धिया पूता लेल डूगडूगी ल लियअ डूग-डूग।
राजेशः- भाई हमरा एकटा रेडियो किनबाक रहै।
बिक्रेताः- हईए लियअ ने एहि ठाम भेटत कम दाम मे निक रेडियो।
मनोहरः- लगैए तोहर दिमाग कतौह हरा गेलौ। घर मे टी वि छौ तइओ?

राजेशः-( अफसोस करैत) तोरा केना कहियौ की।
विमलाः- कहू तऽ सी. डि. टी. वि. के युग में कहू तऽ कियो आब रेडियो किनतैए।
राजेशः- (हॅसि क) इ हमरा पाही वाली के पसीन तऽ छियै तहि द्वारे त किनि रहल छियै।
मनोहर:- तखन तऽ एखने खरीद ले।
राजेशः- हे भाई एकटा बढ़िया क्वालिटी के रेडियो दिहअ।
बिक्रेताः- ई लियअ भाई साहेब।
राजेश:- हईए ई लियअ पाई। पाई देबाक ध्वनी प्रभाव।
मनोहर:- तऽ चल आब चलैत छी अपना गाम तोरा पाही वाली के मनेबाक लेल।
नीलूः- यौ पाहुन आ हम सभ।
राजेश:- अहॅू सभ चलू ने हमर गाम घर देखि क आपिस चलि आएब।
सोनीः- नहि यौ पाहुन पहिने हमरा सभ के घर तक छोडि दियअ। फेर कहियो अहॉ गाम मेला देखै लेल हम दूनू बहिन आएब।
मनोहरः- ठीक छै तऽ चलू अहॅा सभ कें गाम पर दए अबैत छी तकरा बाद हम सभ अपना गाम चल जाएब।
विमला:- ई भेल ने बुझनुक मनुक्ख वला गप।

ठहक्का लगबैत सभहक प्रस्थान।


दृश्य-5

रसोई घरक दृश्य। कमला गीत गुनगुना रहल अछि।

तखने राजेश मनोहर विमलाक प्रवेश।

राजेश:- सुनू ने सुनू ने सुन लियअ ने.हमर पाही वाली सुनू ..ने।
कमला:- हमरा अहॉक कोनो गप नहि सूनबाक अछि।
राजेशः- हे यै जूनि रूसू सुनू ने.....सुनू ने।
कमला:- कहलहूॅ तऽ नहि सूनैत छियैअ।
राजेशः- अहिं के सुनबाक लेल त बजार सॅं अनलहॅू। देख तऽ लियअ।
कमला:- (खिसियाअ के) हम कि कोनो अहॉं जंेका बहिर छी??

राजेश:- (अफसोस करैत) पाही वाली के हम केना बुझबई जे इ कोनो फरमाईश केने रहैए।
विमला आओर मनोहर एक दोसर सॅ कनफूसकीं कऽ गप करैत।
मनोहर - (विमला सॅं) लगैए कमला के किछू बूझहेबाक चाहि।
विमला - कमला बहिन एतेक खिसियाएल किएक छी। हमरा त कैह सकैत छी।
कमला - हिनका की कहियैन बहिन। पहिल सालगीरह के दिन हिनका सॅ किछू फरमाईश केने रहियैन मुदा हिनका तऽ कोनो धियाने नहिं रहैत छनि?

विमला - कहू तऽ एतबाक लेल एहेन खिसियाएब। पहिने देखियौ तऽ सही ओ अहां लेल कथी अनने छथि।
कमला - कथी इहे ने अंधरा बजारक मेथी।
विमला - नहि यै बहिन अहॉ एक बेर देखियौ त सही।
कमला - (आश्चर्य भाव सॅं) हे भगवान ठीके मे
कमला- राजेश सॅं हमरा लेल कथी अनने छी से देखाउ ने।
राजेश - हे भगवान आई अहॉ बचा लेलहॅू नहिं त...त आई फेर सॅ।
कमला - की भेल अहॉ के?
राजेश - (हरबराईत बजैत अछि) अहॉ बैग खोलि क क देखू ने हम कथि नेने एलहॅू अहॉ लेल स्पेशल मे।

बैग खोलबाक ध्वनी प्रभाव।
कमला- (हॅसि क) र...र....रेडियो। आब त हम मजा सॅं कांतिपूर एफ.एम जनकपूर एफ.एम. दरभंगा विविध भारती रेडियो सुनैत रहब।
राजेश- अहॉक मोन जे सुनबाक अछि से सुनैत रहू मुदा आब मानि जाउ ने।
कमला - (रूसि कें) रेडियो त अनलहॅू मुदा झुमका किएक नहि अनलहूॅं?
मनोहर- हे भगवान फेर सॅ एकटा नबका मुसिबत तूहिं बचबिहअ।

राजेश - हे यै पाही वाली हम अहॉं लेल बरेलीवला झूमका सेहो अनने छी। आब मानि जाउ ने।
सभ गोटे ठहक्का लगबैत। हॅसबाक ध्वनी प्रभाव।

मनोहर - वाह-भाई मानि गेलहॅू । रूसल कनियॉं कें मनाएब तऽ कियो राजेश सॅं सीखेए।
सभ गोटे एक संगे ठहक्का लगबैत हा...हा...।

।समाप्त।

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  1. हे यै पाही वाली हम अहॉं लेल बरेलीवला झूमका सेहो अनने छी। आब मानि जाउ ने।
    वाह-भाई मानि गेलहॅू । रूसल कनियॉं कें मनाएब तऽ कियो राजेश सॅं सीखेए।
    राजेशः- पाही वाली तऽ मानि गेलैए चल आब ठारही वाली के मनबैत छी।
    मनोहरः- हॉफैत हं हॅं हं किएक नहि? जल्दी दौगल चल।
    मदनः- भ भ भाई हमर द द दक्षिणा।
    ati sundar एकटा हास्य रेडियो नाटक)

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