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पाठकगण,
मैथिल आर मिथिला ब्लॉग

हमरा लोकनिक समक्ष एक-दू टा एहेन रचना एहि चर्चित ब्लॉग पर प्रकाशित भेल अछि, जे कि स्पष्ट रूप स' नक़ल कयल गेल अछि आ ओहि रचनाक शीर्षक एहि प्रकारे अछि-

पहिल-  तरुवाक पंच तिलकोर - प्रविष्टिकर्ता (मदन कुमार ठाकुर) /रचनाकार (मुकेश मिश्रा)
दोसर-  आमक झगरा - प्रविष्टिकर्ता (मदन कुमार ठाकुर) /रचनाकार (मुकेश मिश्रा)

ई प्रसंग हम एहि दुआरे नहि उठा रहल छी, जे हमरा प्रविष्टिकर्ता (मदन कुमार ठाकुर) /रचनाकार (मुकेश मिश्रा) स' कोनो तरहक आपसी द्वेष वा ईर्ष्या अछि (जहां तक हमरा लोकनि एक-दोसर स' अपरिचित छी), मुदा ई प्रसंग हुनका पक्ष में उठायब अत्यधिक उचित बुझना जा रहल अछि, जे एकर मूल रचनाकार छथि आ इन्टरनेट के दुनिया स' दूर एहि प्रकारक जानकारी स' शायद अनभिज्ञ हेताह I
ई बहुत दुःखक बात अछि जे मूल रचनाकार के श्रेय त' दूर हुनक नामों वा सौजन्य के चर्चा तक कतहु नई देखना जा रहल अछि I हम एहि रचना पर टिप्पणी दैत रही मुदा अकस्मात् रचना देखल सन बुझना गेल, हम ठमकि गेलहुँ आ ओहि दिन स' ओहि पुस्तकक खोज में लागि गेलहुँ अंततः सफलता भेटल अर्थात साक्ष्य भेटल, तैं अपनें लोकनिक समक्ष एहि प्रसंग के रखबा में बिलम्ब सेहो भेल क्षमा चाहै छी I

पोथीक जानकारी :
पोथीक नाम- संगम सुधा
(पन्ना सं.-६ आ पन्ना सं.-२४)
लेखक- महेन्द्र कुमार पाठक "अमर"
पेशा स'- मधुबनी कोर्ट में वकील
मैथिल भाषा में एतेक बेसी समर्पणता जे अपन लिखल एहि पोथी के स्वयं ट्रेन में घूमि-घूमि क' एकर प्रचार-प्रसार व्यावसायिक दृष्टिकोण स' नहि, अपितु भाषक उत्थान हेतु करैत रहलाह अछि हुनक एहि असाध मेहनति के बिसरि कियो अपना नाम स' वाहवाही ल' रहल छी ई युक्तिसंगत नहि, नकले करक छल त' ओहि विषय के ल' क' अपन शब्द सजबितौं आ परसितौं I
हमरा एखन जिंदगी के कोनो प्रकारक अनुभव नहि अछि तथापि एकटा निवेदन रचनाकार लोकनि स' ज़रूर करब जे, हमर मिथिलाक माटि ककरो स' ज़रूर बेसी समृद्ध अछि ओ चाहे धन में होय, बल में होय वा बुद्धि में होय, ककरो स' दस डेग आगुए रहैत छी तैं अपन ह्रदय स' निकलल, अपन बुद्धि स' उपजल जे रचना होय ओएह टा प्रकाशित कराबी जाहि स' अपन आत्मसंतुष्टि सेहो भेटत संगहि लोकक अपार स्नेह आ प्रतिष्ठा I खास क' एहेन तरहक चर्चित ब्लॉग पर त' कथमपि नहि राखी जकरा लग रोज़ के लाखो पाठक अछि I हम आशा करै छी जे रचनाकार अपन मूल रचनाक संग समय-समय पर उपस्थित होइत रहताह आ एहेन तरहक क्रियाकलाप स' बचताह I

स्नेहाभिलाषी :
मनीष झा "बौआभाई"
Mailto: manishjhaonline@gmail.com
Blog: http://manishjha1.blogspot.com/

मैथिल आर मिथिला:- पहिल- तरुवाक पंच तिलकोर आ दोसर- आमक झगरा
एहि जालवृत्तसँ हटा देल गेल अछि आ madan kumar thakur जीसँ आग्रह जे एहि प्रकारक रचनाक प्रस्तुति प्रविष्टिकर्ता वा आन रूपमे अपना नामसँ तँ नहिये करथि मुकेश मिश्रा  वा कियो आन व्यक्ति सेहो जे हुनका कोनो रचना अपन रचना कहि दैत छथिन्ह तँ तकरा सेहो एहि घटनाक आलोकमे पोस्ट नै करथि ।


जेना कि बौआभाइ ठीके लिखै छथि-
"हमर मिथिलाक माटि ककरो स' ज़रूर बेसी समृद्ध अछि ओ चाहे धन में होय, बल में होय वा बुद्धि में होय, ककरो स' दस डेग आगुए रहैत छी तैं अपन ह्रदय स' निकलल, अपन बुद्धि स' उपजल जे रचना होय ओएह टा प्रकाशित कराबी जाहि स' अपन आत्मसंतुष्टि सेहो भेटत संगहि लोकक अपार स्नेह आ प्रतिष्ठा I खास क' एहेन तरहक चर्चित ब्लॉग पर त' कथमपि नहि राखी जकरा लग रोज़ के लाखो पाठक अछि I हम आशा करै छी जे रचनाकार अपन मूल रचनाक संग समय-समय पर उपस्थित होइत रहताह आ एहेन तरहक क्रियाकलाप स' बचताह I" 

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Delivered by Mithila Dainik

  1. पहिल- तरुवाक पंच तिलकोर आ
    दोसर- आमक झगरा - madan kumar thakur
    एहि जालवृत्तसँ हटा देल गेल अछि आ madan kumar thakur जीसँ आग्रह जे एहि प्रकारक रचनाक प्रस्तुति अपना नामसँ तँ नहिये करथि कियो आन व्यक्ति सेहो जे हुनका कोनो रचना अपन रचना कहि दैत छन्हि तँ तकरा सेहो एहि घटनाक आलोकमे पोस्ट नै करथि अन्यथा हमरासभकेँ हुनका ब्लॉगसँ हटाबए पड़त।

    जेना कि बौआभाइ ठीके लिखै छथि-
    "हमर मिथिलाक माटि ककरो स' ज़रूर बेसी समृद्ध अछि ओ चाहे धन में होय, बल में होय वा बुद्धि में होय, ककरो स' दस डेग आगुए रहैत छी तैं अपन ह्रदय स' निकलल, अपन बुद्धि स' उपजल जे रचना होय ओएह टा प्रकाशित कराबी जाहि स' अपन आत्मसंतुष्टि सेहो भेटत संगहि लोकक अपार स्नेह आ प्रतिष्ठा I खास क' एहेन तरहक चर्चित ब्लॉग पर त' कथमपि नहि राखी जकरा लग रोज़ के लाखो पाठक अछि I हम आशा करै छी जे रचनाकार अपन मूल रचनाक संग समय-समय पर उपस्थित होइत रहताह आ एहेन तरहक क्रियाकलाप स' बचताह I"

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  2. अजीत-मैसूर।

    धन्यवाद बौआ भाई,
    अपनेँक सजगता मा मैथिलीकेँ शक्ति प्रदान करतनि, अशेष शुभकामना।
    पूर्वक रचनाकेँ आदर्श बनाए तँ नब रचना अदौसँ होइत आएल अछि, मुदा दोसरक रचनाकेँ अपन कहि प्रकाशित कराएब घोर पाप थिक। तेँ एहन कर्मसँ बचि सर्वथा नव साहित्यक रचना कए प्रतिष्ठा प्राप्त कएल जाए सकैत अछि।
    अजीत-मैसूर।

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