कुण्डलिया

एहि कुण्डलिया मे मात्राक कमी अछि, सुधी पाठक सँ क्षमाप्राथी छी।

महँगाइ तँ बाबू सरिपहुँ केलक कमाल
चिन्नी चक्कर दए रहल घीअक पड़ल अकाल
घीअक पड़ल अकाल, तीमन मे आगि लागल
चिक्कस सतरह तँ तेल सत्तर अछि भागल
कह अनचिन्हार करु ने मूँह सँ चरचा
बरतन-बासन बेचि चलाउ घरक खरचा

2 टिप्पणियाँ

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

  1. महँगाइ तँ बाबू सरिपहुँ केलक कमाल
    चिन्नी चक्कर दए रहल घीअक पड़ल अकाल
    घीअक पड़ल अकाल, तीमन मे आगि लागल
    चिक्कस सतरह तँ तेल सत्तर अछि भागल
    कह अनचिन्हार करु ने मूँह सँ चरचा
    बरतन-बासन बेचि चलाउ घरक खरचा
    etay महँगाइ se shuroo bhel achhi te महँगाइ antim shabd hebak chahi kharcha nai
    घीअक पड़ल अकाल pahil dohak ant me aa beechak rolak shuru me theek aayal achhi.

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