कुण्डलिया - मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 30 मार्च 2010

कुण्डलिया

एहि कुण्डलिया मे मात्राक कमी अछि, सुधी पाठक सँ क्षमाप्राथी छी।

महँगाइ तँ बाबू सरिपहुँ केलक कमाल
चिन्नी चक्कर दए रहल घीअक पड़ल अकाल
घीअक पड़ल अकाल, तीमन मे आगि लागल
चिक्कस सतरह तँ तेल सत्तर अछि भागल
कह अनचिन्हार करु ने मूँह सँ चरचा
बरतन-बासन बेचि चलाउ घरक खरचा