गीत - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 18 मार्च 2010

गीत


हम पहिल बेर अपने लोकनिक सेवा मे गीत प्रस्तुत कए रहल छी।



छौड़ी चलै छैक एटम-बम के चालि (२)
हे रे - छौड़ी -----
जेम्हरे चलै, भुइयाँ डोलै
छौड़ा सभहँक फटै छैक मालि
छौड़ी चलै ---------


अँचरा ओकर फेकै छैक धधरा
कारी केश तँ लागै छैक बदरा
ठोर पर छैक भोरक सूरज
आँखि ओकर कमला-धार
छौड़ी चलै ---------


हम तँ बूझू सगरो देखल
रूप मुदा एहन नहि भेटल
डाँड़ लचका कए मोन भरछाबै
छाती ओकर दै हिया सालि
छौड़ी चलै ---------


रूप ओकर छैक चानी पीटल
छाँह ओकर बड़ शीतल-शीतल
मोन हमर तँ ओकरे पर रीतल
हमरे भेटतै आइ ने काल्हि
छौड़ी चलै ---------*