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आ अन्तमे हम नोकरी स्वीकार क’ लेलहुँ। थाकि गेल छल मोन तीन माससँ दरखास्त दैत दैत। फोन्टन पेन झमान भ’ करचीक कलम जकाँ रहि गेल आ नोन-मसल्ला आदि धरबा लेल डिब्बा-डिब्बीक आब कोनो टा दरकार नइं-दोआतक ततेक ने अमार लागल छल चारूकात। ढन-मन पसरल, जेना नेना भुटका ओकरे ल’ क’ क्रिकेट खेलएबाक अभ्यास करैत हो। नित्तह चारिटा दरखास्त लिखी नियमसँ। एकटा ढर्रा बना नेने छलहुँ, ओकरे नकल क’ ली सभ बेर, खाली हाकिम आ पदक नाम टा बदल’ पड़ए। काॅलेजोमे एतबा कलम-घस्सी नइं कएने छलहुँ, से हाथराम एना कुहरथि जेना जाँतक लागनि चलौने होथि। ओहि वेदना पीड़ित हाथसँ माथ ठोकि मासक दस तारीख धरि चावसी आदिक प्रमाणपत्राक नकलक संग नत्थी क’ दरखास्त सभक रजिस्ट्री कराबी। मासक एगारहम तारिखसँ बीसम तारिख धरि पन्द्रह पैसाही सादा लिफाफे पत्रा-पेटीमे खसाब’ पड़ए,केँचा-कौड़ीक कमी भ’ जएबाक कारणें। लिफाफ नइं भरिया जाओ, तैं बी. ए. टाक प्रमाणपत्रा दरखास्तक संग गाँथि पाबी। आ मासक नांगरि पछिला दस दिन भोर-साँझ पुस्तकालय सभमे अखबारक दोसर पृष्ठक मनोयोग-पूर्वक पारायण आर वान्टेड टीपब, गजेटेड अफसर सभसँ प्रमाणपत्रा आदिक ट्र ू कापी अभिप्रमाणित कराएब... मने तीन मास घीक टघार जकाँ टघरि गेल, आर हम बीस तिये साठि, गुने चारि, मने दू सै चालीस टा दरखास्त पठा देबाक पुण्यलाभ क’ चुकलहुँ, तखन मोन ठेहिया गेल... क्यो जवाब नइं देलक। एहन बकटेटर अछि कर्मे... डाकपीन टोकारासँ फराके तबाह, जेना अगाँमे नढ़िया रस्ता काटि देतनि, देखितहिं साइकिल मोड़ि लेअए... आ हमरा तखन अपने पता पर सन्देह होमए लागल तँ एकटा दरखास्त अपने ओहि ठामक पता लिखि क’ खसेलहुँ, आ से हमरा प्राप्त भ’ गेल। तखन सोलहो आना विश्वास भेल, जे ठीक हमर कर्मे ठिठिआएल अछि। आर फेर ओहि दिनसँ बिचारलहुँ, डाक टिकटमे पाइ खर्च करबासँ नीक अछि, पोस्टल आर्डर कीनब, आ दरखास्त लिखबाक स्थान पर वर्ग पहेली भरब... मनोरंजन, पीड़ा-हरन आ शब्द-संचयन। संसारक सर्वसुन्दर कार्य थिक वर्ग-पहेली भरब... जीवनो तँ गर्व-पहेलिये अछि... एना बैसाबी, नइं ओना।
आ नोकरी भेटबाक आशा तँ छोड़िए देलहुँ... चलू नट्ठे रहब।
भगवानक लीला, एक दिन वर्ग-पहेली भरि रहल छलहुँ। पछिला तारीखमे एक गोटेकेँ बीस हजार टाकाक पुरस्कार भेटल छलनि। ओ बिहुँसि रहल छलाह। हमहूँ बिहुँसि उठलहुँ, जेना ओ हमरे फोटो हो, आ हमरे पुरस्कार भेटल हो... मोन आनन्दसँ हरियर बाध भ’ रहल छल आ फेफरा फुलि क’ फुटबाॅल जकाँ हरियरी पर उछलि रहल छल। तखने खिड़की दिससँ एकटा झटका लागल। हम दस लग्गा उछलि क’ आउट भ’ गेलहुँ। मूड आॅफ भ’ गेल। मुदा ओहि झटकाक संग हमर कपारोक दरबाजा फटाक द’ खुजि गेल छल। ई झटका आर किछु नइं, डाकपिन द्वारा फेकल गेल... नोकरीक हेतु अन्तर्वीक्षा लेल बजाहटि छल, सादा लिफाफ, मुदा कतेक पियरगर? सरकारी मोहरक सिन्दूर-बिन्दी लगौने। तीने दिनक बाद अन्तर्वीक्षा होएबाक छलै। अन्तर्वीक्षामे सम्मिलित भेलहुँ, आर नोकरी भेटि गेल। आ जँ सत्य पूछी, कहब मोश्किल छल जे हजारो बकरी-छकड़ीक परीक्षार्थी-समुदायमे ककर गुद्दा बेसी पसिन पड़तनि, के कहौ? ...ओ तँ खन्ना साहेबक कृपा, जे हमरा दिससँ मात्रा सै रुपैयाक उपहार, सर केर कनक चरण धरि पहुँचा अएलाह, अपने नेना-भुटका, कुकुर-बिलाइ सभक संग फस्ट-किलासमे सिनेमा देखि, हमरा कृतार्थ कएलनि, तँ विश्वास भ’ गेल, जे नोकरी अफसरक दरबारमे रिजर्व राखल अप्सरा थिकीह... हुनकर कृपा-कटाक्षसँ किरानीक पत्रा प्राप्त भेल। आ हम साष्टांग-दण्डवत कएलहुँ-
जय-जय हे नोकरी - स्वर्गकेर महरानी।
अफसर राजा कृपा बनब हम आइ किरानी।।
अहाँ पूछब, एहिसँ पहिने की झाम गूड़ैत छलहुँ? नइं, हम झाम तँ नइं, कागज गूड़ैत छलहुँ, मने पत्राकार छलहुँ, आब गुप्त की राखी, जखन सरकारी नोकरी भेटि गेल, प्रतिष्ठे बदलि गेल। कहलहुँ ने पत्राकार, मुदा असलमे हम प्रूफरीडर छलहुँ। ओना, प्रूफ-रिडरियोक जड़िमे छल एकटा साधारण ट्यूशन मात्रा।
बी. ए. पास करबाक उपरान्त पत्राकारिता, मने प्रूफरीडरी, मने ट्यूशन हम करैत छलहुँ एकटा जिम्मरि दुब्बरि, सात वर्षीया कन्याक। दूनू साँझ। आ बाँकी दिन भरि इम्प्लायमेंट एक्सचेंजक अगुअति-पछुअतिक ओगरबाहि।
ट्यूशनिया सात वर्षीया कन्याक जन्म बड़ कबुलापातीक उपरान्त भेल छलनि। पिताजी बिजनेसक हेतु अपन नगरसँ कम्मे संबंध रखथिन, आइ बम्बइ तँ काल्हि कलकत्ता करथि। आ जेहन लाह, तेहन भाग। से माताजी मेक-अपसँ बनल-ठनल दर-दरबार फुदकल चलथि, आ परम्परानुसार एक दिन एम. एल. सी. भ’ क’ रहलीह। हुनक नांगड़ि पकड़ि क’ सेठोजी ताज पोषित भ’ आटी-पाटी खा आबथि। आ जेना-जेना राजा रजबाड़सँ चीन्हा-परिचय बढ़ैत गेलनि, बिजनेस सुरसाक मुँह सन फल्लड़ होइत गेलनि आ अपने दौड़-धूप कने बेसी कर’ लगलाह... यथा वीर हनुमान।
एम. एल. सी. महोदया लग एक दिन पत्राकार बनबाक अपन आकांक्षा प्रकट कएलहुँ। ओ गद्गदायमान होइत हमरा एकटा प्रेसमे ल’ गेलीह, एकटा प्रूफरीडरक कुर्सी हमरा हेतु खाली कराओल गेल। हम पत्राकार, मने प्रूफरीडर भ’ गेलहँु, ओहि दिनसँ देवीजीक दया-दृष्टिक मारि हमरा पर सभ दिन पड़ैत रहल। अगिला मासक पहिल तारीख आएल। पैंतालिस टा टाका टेंटमे खोंसि सकलहुँ।
आगाँ दरमाहा बढ़ि जएबाक उम्मीदक संग प्रेस घुरलहुँ तँ सोझे खादी भंडार पहुँचलहुँ। एक सेट धोती-कुरता आ सेनहुली-बंडी रेडीमेड किनलहुँ, एकटा चामक बेग, एकटा नकली चश्मा। एहि सभसँ सीटल-साटल रेडीमेड बनल पानक दोकान पर ठोर रंगि अयनामे अपन आकृति देखलहुँ त’ क्षुब्ध भ’ गेलहुँ, सै प्रतिशत पत्राकार। मोन पड़ि गेल अपन चारि मास पहिनेक दाढ़ी बढ़ल मुखरा, मैल-मोड़ल बाँहिक कमीज, फाटल धोती... जखन एकटा सै टाका मासी ट्यूशन भेटल छल, तीनिये चारि दिनुका बाद युवती छात्रा बाजलि छलीह-मास्टर साहब, आप थोड़ा-सा भी रसिक नहीं हैं। साहित्य क्या पढ़ाएंगे?-ओही दिन अपन कवि हृदयक अपमान जानि, हम ओ ट्यूशन छोड़ि देने छलहुँ। से आइ बुझना जाइत छल रसिकताक महत्त्व। आ प्रसन्न मोन भेल जखन देवीजीसँ भेंट कएलहुँ। ओ ततेक आकस्मिक ढंगसँ सम्मान कएलनि आ कमलक फूल जकाँ दपदपा उठलीह जे ओहि दिनसँ हम हुनक बे-बहाल पी. ए. (खास सहायक) भ’ गेलहुँ। आब तँ ओ जत’ जाथि, हमरा अवश्य संग क’ लेथि। हमर भोजनोक व्यवस्था हुनके ओहि ठाम होम’ लागल... मुदा हमर मोन रसगुल्लो-पुराणक पारायणसँ प्रसन्न नइं भ’ रहल छल... पानक लालीसँ रंगल अधर सुरा-सुरसरिक धार पर झिल्हैर... हमरा संतुष्ट नइं क’ सकल।
एकटा सुनसान जकाँ बुझि पड़ए, भकोभन्न... जेना फाटल बाँसक बँसुरी बजा रहल होइ... जेना भारतीय फिल्म सभक अधिकतर संगीत श्रेणीक हल्ला-गुल्ला... तखन अपन नव विवाहिता पत्नी मोन पड़थि, हुनक लिखित पाँती मोन पड़ए... जकरा बेर-बेर पढ़ैत-पढ़ैत पहिने आनन्दित आ फेर अनमनाएल सन भ’ जाइ तँ बुझि पड़ए जेना कोनो संताली इलाका हो। बाघ-शेर-गर्जित वन। जानवरक डरसँ हम एकसर डाकबंगलामे बन्द छी, कतहु पहाड़ परसँ संताल नृत्यक ढोल-बँसुरीक स्वर आबि रहल अछि। नृत्यक बोल हमरा बजा रहल अछि। पंगु बनल हम छटपटा रहल छी।
...पत्नी लिखलनि अछि... विवाहक उपरान्त प्रण कएने छलहुँ, शीघ्रसँ शीघ्र संगे राखब। ...नाथ, हमर सखी सभ अपन-अपन प्रियतम संग खिलखिला रहलि छथि, आ हम अहाँक प्रतीक्षामे स्मृतिक दीप जरौने बैसलि छी। ...संगमे ओ प्रसिद्ध गीतक पाँती सभ लिखि देने छलीह जाहिमे एक स्त्राी कारी-कारी बादरि देखि मयूरी जकाँ कुहुकि उठैत छै... सभक साजन परदेशमे छै। बादरि बरसि रहल अछि। मयूरनी कुहुकि रहल अछि। हमर मोन कचोटि रहल अछि। नयनसँ नोर बहि रहल अछि...।
हम आँखि पर लाधल मेघकेँ कोनहुना टारि दी। रहि-रहि पान खाइ आ बिहुँसबाक प्रयास करैत रही। नोकरी भेटि जएबाक आशा छल। हे सुन्नरि, सरकारी नोकरी भेट’ दिअ’, फेर अहाँकेँ कहियो फराक नइं रह’ देब।
एखन की करी?
जतबा पाइ प्रेस आ ट्यशूनसँ भेटै’ए, ततबामे तँ भोजनो चलब दुर्लभ छल। जँ देवीजीक कृपापात्रा नइं रहितहुँ? विवाहक दू वर्ष लागि रहल छल। पत्नीकेँ विदा नइं करा सकल छलहुँ। सासुरक लोक सोझे विदा करा लेब’ लेल कोना कहितथि? एम्हर-ओम्हरसँ ताना भरल तगेदा भेटिए जाइक तैयो। विवाहक उपरान्त कोन पिता अन्तरमनसँ पुत्राीसँ मुक्त भ’ जएबाक इच्छा नइं रखैत छथि?
मुदा हम हारलहुँ नइं। दरखास्त फेकैत गेलहुँ।
आइ कतेक प्रसन्न छल मोन जे हम फौजदारीमे किरानी भ’ गेल छलहुँ। बी. ए. छीहे। शीघ्र तरक्की होयत। आर खन्ना साहेबक आश्वासन-लोन डिपार्टमेंट में लगा देंगे... या अंचलमे पेशकार बनवा देंगे। फिर तो यारो, रहेगी हमारी सपरिवार पिकनिक।
से जे हो, सरकारी नोकरी... किछु हो, सरकारी नोकरी अछि। पचहत्तरिए भेटत, तैं की? इज्जति तँ छै। आ इज्जति छै तँ खुशामद आ खुशामद माने आमद। मोन मधुरा गेल... एकटा डेरा लेब। पत्नीकेँ विदा करा अनबनि।
आ हम नोकरी स्वीकार क’ लेलहुँ आइसँ। भरि दिन कार्यालयमे नव फाँसल सुग्गा जकाँ अनभुआरे बनल रहलहुँ। साँझ खन जखन कार्यालयसँ निकलि कचहरीक हातामे अएलहुँ कि पाछाँसँ सोंधी साहेब हाथ पकड़लनि-हल्लो मि. जर्नलिस्ट, बहुत दिनों बाद मिले हैं यार!
आ झट द’ हाथ मिलौलनि। अंग्रेजी-मिश्रित हिन्दीमे गप्प-सप्प करैत रहलाह... चलू, डेरे पर गप्प-सप्प करबाक अछि। मोन नइं लागि रहल छल। अफसर सभ रिलीफक काजसँ बाहर चल गेल छथि। एतबे नइं, डेरो पर क्यो नइं अछि एखन। आ फेर अहाँ सभ सन साहित्यिक लोक तँ बड़ मस्त जीब होइत छथि। ...बड़ अवसर पर भेंट भेल।
आ मोटर विदा भ’ गेल। अपने चला रहल छलाह। हम हुनक कातमे बैसल छलहुँ। ड्राइभर पाछाँ छल, चपरासीक संग।
मोटर सोंधी साहेबक बँगला दिस भागि रहल छल। सोंधी साहेब फस्र्ट क्लास मजिस्ट्रेट छथि आ खूब चलता-पुर्जा। एहन चलता-पुर्जा जे शीघ्रे जिलाधीश भ’ क’ रहताह... तैं लीडर आदिक गाढ़ परिचय आवश्यक छलनि। कैक बेर देवीजीक डेरा पर आएल छलाह। देवीजी संग रहने हमर एहि तरहक मान होइत छल जेना हमर बाप-दादा कोनो पैघ जागीर छोड़ि क’ मरल होथि आ हम सौखसँ पत्राकारिता क’ रहल होइ। मोटर बँगला पर आबि क’ रुकल। ड्राइभर उतरल। दरबजा खोललक। साहेब आगाँ बढ़लाह। चपरासी सलाम देलक आ हमरा हुनक चैम्बरमे बैसौलक। पहिनेसँ ओहि ठाम हुनक स्टेनो बैसल छल। हम सोच’ लगलहुँ जे सरकारी नोकरीमे कतबा इज्जति छै। सभ-सभकेँ समान दृष्टिसँ देखैत छै। साहेब आ किरानी मित्रावत रहै छथि। मोन भेल... आब निश्चय लोन डिपार्टमेंटमे बदली भ’ जाएत... जखन साहेब मित्रा छथि। आर बुझि पड़ल जेना सौंसे फौजदारी कचहरी हमरा सलाम क’ रहल अछि, हम बिहुँसि रहल छी...।
तखने सोंधी साहेब चैम्बरमे प्रवेश कएलनि, हमरा सभ ठाढ़ भ’ गेलहुँ। ओ स्टेनोकेँ बाहर जएबाक इशारा कएलनि आ बजलाह-ई किरानी-तिरानीक आगाँमे भरिपोख गप्प करब नीक नइं। असिस्टेंट कहुना अस्टिेंट अछि-माथ पर चढ़ि जाएत आ अहाँ भेलहुँ पत्राकार-कवि-हृदय-इमोशनल फेलो।-आ चपरासीकेँ चाय मंगएबाक आदेश भेल।
राति गाढ़ होइत गेल। हमरा सभक गप्पो गाढ़ होइत गेल। ओ खूब बजबा लेल भुखाएल छलाह जेना। कहलनि, बरोबरि भेंट करैत रहब। अहाँकेँ तँ सदिखन हमरा सभक लग रहबाक चाही-हँ, देवीजीसँ हमर नमस्ते कहि देबनि।
साहस जमाइयो क’ हम नइं बाजि सकलहुँ, जे हम आब पत्राकार नइं छी, अहाँक नीचा किरानी भ’ गेल छी। आ हमरा लोन डिपार्टमेंटमे पठा दिअ’।
हम घूरि अएलहुँ।
दोसर दिन कार्यालय गेलहुँ तँ पता चलल जे हमर बदली भ’ गेल अछि नेपालक सीमा पर कोसी पीड़ित अंचलमे-जत’सँ आएब-जाएब असंभव छल, जत’ रहबाक कोनो ठौर-ठेकान नइं। खन्ना साहेबसँ दरियाफ्त करएलहुँ तँ पता चलल जे ई बदली सोंधी साहेब अपने कएलनि अछि। आ हमरा एहि ठाम नइं राखए चाहैत छथि, कारण हमरा हुनकासँ समताक व्यवहार अछि... आ राति कतेक गुप्त बात सभ कएने छलाह... आ स्टेनो हमरा देखि क’ जरि गेल छल... हमरा रहै हुनका हीन-भावनाक अनुभव हेतनि...
हम सोंधी साहेबक कक्ष दिस बढ़लहुँ।
चपरासी हमर भेंट करबाक आवेदन हुनका जा क’ देलकनि। हम बाहर पर्दाक लग ठाढ़ छलहुँ।
भीतरसँ घुनघुनएबाक आवाज आएल-डर्टी। वेरी इन्डिसेंट... कौन है वह? क्या है? कह दो जाने। मैं नहीं जानता उसे...
आ हम सोझे पाछाँ भ’ गेलहुँ।
आ हमरा बुझि पड़ल जेना हम सरकारी नोकरी नइं स्वीकार कएलहुँ अछि, अन्हार-बोनक ठीकेदारी लेल अछि।

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  1. बहुत निक प्रस्तुति सोमदेवजी..
    संगे जितुजी ब्लॉग के नया रंग रूप बहुत निक लागल, अहिना मिथिलाक लेल मेहनत करैत रहू...

    हमर शुभ - कामना अछि !

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