सावनक बदरी - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 9 जनवरी 2010

सावनक बदरी

सुन्दर नशिमा चैल रहल अछि
जकर स्पर्श सं मोन झूम उठैय
न स नशा जाहीम
अहांक कोमल बदनक याद आवी रहल अछि
शि स शितलता
अहांक कजरैल आखिं जाहीम शांति और सनेह अछि
सावनक इ बदरी म दूर रहैत की वर्णन करू
आवै जखन साथ लक बारिश
ओई समयक की वर्णन करू
दफ्तर म बैसल गिन रहल छि रुपैया चारिआना
अनुभव होइत अछि यैह छि अहाँ मोतीक दाना
खन - खन बाजैत आवाज सुनलौ
अनुभव भेल बाज़ी रहल अछि अहाँक कंगना
यई रानी लिखू चिट्ठी
सावनक संग कहिया बजा रहल छि अपना अंगना !!