देवभाषा नहिं,जनभाषा बनाऊ संस्कृत के - मिथिला दैनिक

Breaking

मंगलवार, 29 दिसंबर 2009

देवभाषा नहिं,जनभाषा बनाऊ संस्कृत के

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सोम सं शुरू भेल दू दिनक राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में, देशभर सं जुटल विद्वानलोकनि संस्कृत भाषा के उज्जवल भविष्यक कामना कएलनि अछि। एहि मंत्रक जयघोष सेहो भेल जे संस्कृत सभ भाषाकेर जननी अछि।
सम्मेलन के उद्घाटन ज्ञानपीठ पुरस्कार सं सम्मानित संस्कृत विद्वान पद्मश्री सत्यव्रत शास्त्री आ राष्ट्रीय संस्कृत संस्था, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति व शिक्षाविद् डा. रामकरण शर्मा कएलनि। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष सिद्धेश्वर प्रसाद सम्मेलन के अध्यक्ष छलथि। उद्घाटन भाषण में पद्मश्री सत्यव्रत शास्त्री कहलनि जे संस्कृत के भविष्य उज्जवल छैक। जाधरि भारतीय संस्कृति के विरासत रहतैक,ताधरि संस्कृत भाषा अक्षुण्ण रहत किएक तं संस्कृत आ संस्कृति हमार सभहक विरासत अछि।
विशिष्ट अतिथि जल संसाधन मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव कहलनि जे हमसभ संस्कृति आ संस्कृत के बिसरि रहल छी जे चिंता के विषय छैक। डा. रामकरण शर्मा के कहब रहनि जे उत्तराखंड सरकार संस्कृत के अतिरिक्त राजभाषा के रूप में शामिल कएने अछि जे सराहनीय कदम अछि। एमएलसी केदारनाथ पाण्डेय कहलनि जे संस्कृत भाषा के देव भाषा बनाकए गौरवान्वित होइत रहब,त ई जनभाषा नहिं बनि पाओत। कामेश्वर सिंह संस्कृत विवि के कुलपति डा. नंदकिशोर शर्मा, कुलानुशासक उमेश शर्मा, डीन डा. अरविन्द पाण्डेय, ब्रह्मचारी सुरेन्द्र, एमएलए कृष्ण प्रसाद सिंह आ पत्रकार के. विक्रम राव सेहो सम्मेलन के संबोधित कएलनि। सम्मेलन में अलख नारायण झा के कविता-संग्रह
पुष्पायण के लोकार्पण कएल गेलैक।