जिवन एक अनमोल गहना (गीत) - विनीत ठाकुर - मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 8 दिसंबर 2009

जिवन एक अनमोल गहना (गीत) - विनीत ठाकुर

जिवन एक अनमोल गहना खुबकऽ झमकाऊ
हिरा मोतिसँ प्रज्वलित सपना नयनमें सजाऊ

कर्मक पथपर चलु आगु छोरु टिकरम जाल
छि अहाँ चमकैत सोना माँ मिथिलाके कोखक लाल
झगर लगाउन चुगला बनिकऽ मुहनै नुकाउ

फूसक एकचारीपर कखनो उरुनै बनिकऽ कौवा
केकरो माथपर ठनका खसा बजवियौनै कैह वौवा
सोनितके हर एक कतरा अपन विकाशमे लगाऊ

मानवता राईख मनमें दोसरके होइयौ सहारा
सबकेउ एक दोशरसँ अपनामे राखू भाईचारा
टुइट परु अधिकारकलेल केकरोसँ नै डेराउ

~: विनीत ठाकुर :~

माता: शान्ति देवी, पिता: ब्रह्मदेव ठाकुर, जन्म तिथि: ०१.०३.१९७६, शिक्षा: बी.एड, सेवा: शिक्षक, स्थायी पता: मिथिलेश्वर मौवाही - ६, धनुषा, नेपाल.. इ-मेल: binitthakur@yahoo.co.in