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जिवन एक अनमोल गहना खुबकऽ झमकाऊ
हिरा मोतिसँ प्रज्वलित सपना नयनमें सजाऊ

कर्मक पथपर चलु आगु छोरु टिकरम जाल
छि अहाँ चमकैत सोना माँ मिथिलाके कोखक लाल
झगर लगाउन चुगला बनिकऽ मुहनै नुकाउ

फूसक एकचारीपर कखनो उरुनै बनिकऽ कौवा
केकरो माथपर ठनका खसा बजवियौनै कैह वौवा
सोनितके हर एक कतरा अपन विकाशमे लगाऊ

मानवता राईख मनमें दोसरके होइयौ सहारा
सबकेउ एक दोशरसँ अपनामे राखू भाईचारा
टुइट परु अधिकारकलेल केकरोसँ नै डेराउ

~: विनीत ठाकुर :~

माता: शान्ति देवी, पिता: ब्रह्मदेव ठाकुर, जन्म तिथि: ०१.०३.१९७६, शिक्षा: बी.एड, सेवा: शिक्षक, स्थायी पता: मिथिलेश्वर मौवाही - ६, धनुषा, नेपाल.. इ-मेल: binitthakur@yahoo.co.in

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  1. खूब बढ़िया लिखल

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  2. जिवन एक अनमोल गहना खुबकऽ झमकाऊ
    हिरा मोतिसँ प्रज्वलित सपना नयनमें सजाऊ

    Vinitji Sabh sa pahine hum ahan ke swagat kare chahab...
    e jain ka ki ahan Nepalak bhumi sa chhi bahut khushi bhel..
    hamar sabhak soubhagy aa Blogak athak prayas je hum sab har tarhak rachna padhi ke jurabe chhi....

    Apnek prastuti bahut nik lagal ahina likhait rahab...

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  3. विनीत जी बहुत निक रचना लिखैत छि आशा अछि जे हमरो सब के लेल और रचना पढय के लेल देब ---
    जय मैथिल , जय मिथिला ,जय मिथिल समाज ,
    मदन कुमार ठाकुर

    उत्तर देंहटाएं

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