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  1. देवांशु जी हमर गप्प के रोख नहि मानब। जे जनसत्ता पढ़ैत हेताह ओ नताशा सँ पूर्वपरिचित हेताह। अपने एकरा मैथिली मे लेलिऐक स्वागत अछि (हिन्दीओ मे अहींक अछि), मुदा की मैथिली आ ओकर व्याकरण के दुर्गति करब अहाँक अभीष्ट अछि। 12/9/09क नताशाक पोस्ट मे नताशाक अंतिम कथन छैक (अहाँक मोताबिक)"टी.वी आँन-आँफ करय लेल माय के बेर-बेर भंसाघर में जायत पड़ैत अछि"। ने भाषा ठीक ने व्याकरण ठीक। क्रिया जाए आ जाएत दुनू एकै वस्तु नहि थिक। ताहि पर "अछि"क प्रयोग सोन मे सुहागा । कृप्या "अछि'क स्थान पर "छन्हि" कए देबै त हमरा पर नहि मुदा मैथिली पर बड़का उपकार करबै अपने ।

    एहन समय मे जखन की आलोचना के व्यत्तिगत दुश्मनी बूझल जाइत छैक हमर टिप्पणी के कोन अर्थ लगेबै अहाँ से हमरा बूझल अछि।

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  2. मैथिल आर मिथिला14 सितंबर 2009 को 10:20 pm

    आशीषजी। देवांशु जी जे काज मैथिली लेल कय रहल छथि से अद्भुत अछि, मैथिलीमे बाल साहित्यक जे अकाल अछि तकरा देखैत।

    अहाँक प्रश्न समीचीन भय सकैत अछि= मुदा अहाँक वक्तव्य के " मुदा की मैथिली आ ओकर व्याकरण के दुर्गति करब अहाँक अभीष्ट अछि।" देवांशुजीक लेल प्रयुक्त करब समीचीन नहि।

    अहाँक आ सभ पाठकगणक - रचनाकारक - प्रस्तुतकर्ताक रचनात्मक- आलोचना/ समालोचनाक स्वागत अछि/ रहत।

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  3. भाषाई त्रुटि पर ध्यान दियेबाक लेल भाइ अनचिन्हार जीक आभार ! हम एडिट क' सुधार करबाक प्रयास केनय छी. मैथिली भाषाक सन्दर्भ मे अपन अल्पज्ञता सं हम नीक जोका परिचित छी तें बेर-बेर त्रुटि दिस ध्यान दिया उपकृत करबाक कृपा करी....

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