मायानन्द मिश्र-मूल्य/ अपन गाम - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 27 अगस्त 2009

मायानन्द मिश्र-मूल्य/ अपन गाम

मूल्य

दूबर पातर छोट-छीन इजोतक टुकड़ी
महाकाय महादानव अन्हारसँ लड़ैत लड़ैत
थाकि रहल अछि
अंग प्रत्यंग टूटि रहल छै
समर्थन लेल एम्हर ओम्हर तकैत अछि
तकैत अछि दूबर पातर छोट-छीन
एसगर इजोतक एकटा टुकड़ी।
टुकड़ीक मोनमे निश्चयक एकटा विस्तृत आकाश अछि
ई लड़त,
अन्त धरि लड़त
एसगरो लड़त, लड़िते रहत
‘अन्हार’कें परास्त करत
निश्चय करत
दूबर-पातर
छोट-छीन
इजोतक ई टुकड़ी।


अपन गाम

अपन ई गाम अपन गाम सन ने लागैत अछि ।

जीबैत लोक आई बेर बेर मरैत अछि ।

बिसरी गेलै हंसी करब दलान आँगन सँ

हंसी देखैक लेल लोक आई हँसैत अछि ।

ओकनी गेलै मेह्दिक गाछ आँगन सँ

सादिक नोर युगक लेख आई बनैत अछि

कतेक लोक मे कतेक लोक अछि असगर

उदास पल दिनुक निराश राती गनैत अछि ।

छिना गेले हंसी कतेक आई खरिहानक

सिमान गाम केर कते उदास रहैत अछि

अन्हार खोह सँ कते अपन इजोत तकैत अछि

दिनक लहास नेने फेर भोर अबैत अछि ।