दयो करबाक बेर होइत छैक- कुलानन्द मिश्र/ - मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 14 अप्रैल 2009

दयो करबाक बेर होइत छैक- कुलानन्द मिश्र/


दयो करबाक बेर होइत छैक - कुलानन्द मिश्र



पोखरि बेश फुला गेल छैक दोसर बेर जाल फेकबा सँ पहिने
मोहना जाल केँ झाड़लक तऽ एकटा छोट-छिन पोठिया
छटपटाइत कूदि गेलै पोखरि मे
मोहनाक मोन मे खुशी भेलैक
ओकरा नीक लगलै जे ओ कूदि गेलै
पड़ा गेलै जाल सँ
ओकरा ठोर पर चाकर मुसकी पसरि गेलै

ओ फेर जाल केँ पोखरि मे पसारलक
आ एहिबेर पहिलुक खेपसँ
पैघ-पैघ आ पुष्ट-पुष्ट माछ
जाल सङ्गे खिचाकऽ बाहर आयल
मोहनाक आँखिक आगाँ
ओ पड़ाइत पोठिया फेर नाचि गेलैक
ओ फेर बिहुँसल
आ सोचलक
दयो करबाक बेर होइत छैक!