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दयो करबाक बेर होइत छैक - कुलानन्द मिश्र



पोखरि बेश फुला गेल छैक दोसर बेर जाल फेकबा सँ पहिने
मोहना जाल केँ झाड़लक तऽ एकटा छोट-छिन पोठिया
छटपटाइत कूदि गेलै पोखरि मे
मोहनाक मोन मे खुशी भेलैक
ओकरा नीक लगलै जे ओ कूदि गेलै
पड़ा गेलै जाल सँ
ओकरा ठोर पर चाकर मुसकी पसरि गेलै

ओ फेर जाल केँ पोखरि मे पसारलक
आ एहिबेर पहिलुक खेपसँ
पैघ-पैघ आ पुष्ट-पुष्ट माछ
जाल सङ्गे खिचाकऽ बाहर आयल
मोहनाक आँखिक आगाँ
ओ पड़ाइत पोठिया फेर नाचि गेलैक
ओ फेर बिहुँसल
आ सोचलक
दयो करबाक बेर होइत छैक!

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  1. ओ फेर जाल केँ पोखरि मे पसारलक
    आ एहिबेर पहिलुक खेपसँ
    पैघ-पैघ आ पुष्ट-पुष्ट माछ
    जाल सङ्गे खिचाकऽ बाहर आयल
    मोहनाक आँखिक आगाँ
    ओ पड़ाइत पोठिया फेर नाचि गेलैक
    ओ फेर बिहुँसल
    आ सोचलक
    दयो करबाक बेर होइत छै

    thike

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  2. ओ फेर जाल केँ पोखरि मे पसारलक
    आ एहिबेर पहिलुक खेपसँ
    पैघ-पैघ आ पुष्ट-पुष्ट माछ
    जाल सङ्गे खिचाकऽ बाहर आयल

    han pothi par matra daya

    मोहना जाल केँ झाड़लक तऽ एकटा छोट-छिन पोठिया
    छटपटाइत कूदि गेलै पोखरि मे

    thike

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