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अहंकार
आ महत्त्वाकांक्षा
जखन
विवेकक सीमामे नहीं अँटैछ,
महाभारत-
तखने मचैछ।

पुत्र-मोहमे पड़िक'
आनक हिस्सा हड़पैए
जखन आन्हर धृतराष्ट्र
द्रोपदीक अपमानसँ
लज्जित होइत अछि;
जखन सम्पूर्ण राष्ट्र;
सम्पत्ति
आ शक्तिक मदमे
जखन दुर्योधन
नँगटे नचैछ;
महाभारत-
तखने मचैछ।

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