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जनसत्ताक 1 मार्च 2009, रवि दिनक अंक में अपन स्तम्भ कागद कारे में प्रभाष जोशी एक रेल यात्राक विवरण देइत रेल बोगी में एक गोट दम्पत्तिक आपसी व्यव्हार (जे हुनका अरुचिकर लागलैन)
केर जिक्र केने छथि. ओ लिखैत छथि - मुस्कान आ बोली सं ओ दंपत्ति बिहारक लगैत छलै.
बोली सं प्रान्त चिह्नब कोनो विशेष बात नहि मुदा मुस्कान सं ??????
की बिहारक लोक सबहक मुस्कान आन प्रान्तक लोक सब सं भिन्न होइत छैक ???
( इ किछु आर नहि पूर्वाग्रहक प्रस्तुति थिक.) जेना कि हुनकर वर्णन छैन्हि अहि मुस्कानक कोनो नीक अर्थ लगायब मोश्किल अछि. संस्मरणक अंत होइत होइत एहन संकेत भेंटत अछि ओ दंपत्ति तें अभद्र छलै जें बिहारक छलै. हुनकर स्तम्भ सं सन्दर्भ अंश उपलब्ध करायल जा रहल अछि (देखू www.maithilimandan.blogspot.com ). प्रभाष जोशी सन व्यक्तित्व सं अहि तरहक टिपण्णीक अपेक्षा नहि कयल जा सकैछ.

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  1. हिन्दीक केहनो व्यत्तित्व बिहारक भाषा (ओकरा नजरि मे बोली) अर्थात मैथिलीक लेल वएह भावना छैक जेना इसराइलक नजरि मे फिलिस्तीन। जहाँ धरि मुस्कानक सवाल छैक प्रभाष जोशी सँ हम बिल्कुल सहमत छी।
    सभ गोटे सहमत हेताह, बिहारक लोक लग विषाक्त मुस्कान नहि होइत छैक इ गप्प जोशी के पता छन्हि।
    तँए एहि गप्प के मठिआ कए , जोशीजी के धन्यवाद दिऔन्ह।

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  2. निश्चल मुस्कान अओर हंसी बिहार में बहुत आम बात छैक. जोशी जी के ई बात बहल होयेतन्हि.

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  3. thik kahlahu , ee sabh communist chhathi ki regional purodha nahi jani

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