एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी( प्रथम कड़ी) - मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 17 फ़रवरी 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी( प्रथम कड़ी)


एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन करबाक अछि।


हम सदिखन अपना के हुनकर शिष्या सहचरी आ नही जानि कि सब बुझैत रही। हुनक कि एकोटा एहन रचना छलैन जकरा कि हम पूरा होम स पहिने कैएक बेर नहि सुनैत रही। हम त हुनक एक- एक रचना के ततेक बेर सुनैत रही जे करीब करीब कंठस्त भ जैत छल। एक एक संवाद आई धरि ओहिना हमर कान में गूंजैत रहित अछि। हम त हुनक सबस पैघ आलोचक, सबस पैघ प्रशंसक रही। अद्भुद कलाकार छलाह, एक कलाकार में एक संग एतेक रास गुण भैरसक नहि होइत छैक। लेखक, निर्देशक, अभिनेता,गीतकार, संगीतकार, सब गुण विद्यमान छलैन्ह। हमारा कि बुझल जे नीक लोकक संग बेसी दिनक नहि होइत छैक। भगवनोके नीक लोकक ओतबे काज होइत छैन्ह जतबा कि मनुष्य के। हमत भगवान् स कहियो किछु नै मान्गलियैन, बस हुनक संग सदा भेंटय
यैह टा कामना छल। मुदा एक टा बात निश्चित अछि जे, जओं भगवान छैथ आ कहियो भेंटलैथ त अवश्य पुछ्बैन्ह जे ओ हमारा कोन गल्तिक सजा देलैथ, हम त कहियो ककरो ख़राब नै चाहलिये।


एतेक कम दिनक संग परंच ओ जे हमरा पर विश्वास केलैंह आ हमारा स्नेह देलैंह शायद हमरा सात जन्मों में नहि भेंट सकैत छल। एखनो जं हम हुनक फोटो के सामने ठाढ़ भ जैत छी त बुझैत अछि जे ओ कहि रहल छैथ हम सदिखैन अहाँक संग छी।