उदाश मोन - सन्तोष मिश्र, काठमाण्डू - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 10 नवंबर 2008

उदाश मोन - सन्तोष मिश्र, काठमाण्डू

उदाश मोन

अपन प्रेमीकाकेँ कहलापर उमेश विना विवाह भेनेमे ओ वावुजी सँ भिन– भिनाउजक वात करऽ लगलनि । सन्तान जाहिसँ खुस रहे वोहीमे अपन खुसी बुझिकऽ बाबुजी सबकिछ मे सँ हिसा लगाकऽ उमेशके अपना नामपर कऽ दैछथि । सम्पती उमेशकेँ नामपर देखिकऽ उमेशकऽ प्रेमिका आशाकेँ ओ सम्पती पर लोभ भऽ जाइछैन । उमेश सऽ करिब १० वर्ष जेठ विधवा प्रेमिका उमेश सँ सम्बन्ध तखन वनबैय जखन ओ कक्षा नौ मे बढैत रहैक । एकदिन उमेशकऽ माँ विमार भऽगेली आ हुनका जचाबऽ लेल जखन उमेशकेँ बाबुजी पटना लजाइत रहैथ त अपन परोशी विधवा आशाकेँ कैहगेली जे उमेशके भोजन वनादेबऽ लेल जाही सँ उमेशके कोनो प्रकारक दिकत नहि होइन । आशा उमेशकेँ लेल बडशासन भोजन बनाक खुएलनि आ ओही अंगनामे सतएली । आ कनेक वेर बाध आशा से हो ओही पलंगपर आविकऽ सुतिरहली । रातिमे उमेशके ओ भैर पाजकऽ पकरली । उमेशकेँ निन त टुटिगेलैक मुदा ओ अन्ठिआदेलन । दोसर दिन ई वात उमेशक दिमागपर नचैत रैह गेलैक । जे ई रातिमे डेरागेलनि कि केना ? कथिला ओ हमरा ओना पकरलनि ?" आ ई वात सोचैत उमेशके रातिमे निन सेहो नइ परैक । कर बदलवेरमे उमेशक हात आशाकऽ स्तन पर परिगेलैक । एतवेमे ओ उमेश दिश धुमिगेली । आ उमेशकेँ पैरपर अपन एकटा पैर धऽदेली फेरु ओ उमेशकेँ सहलाबऽ लगली आ............। फेर, ताही दिनसँ उमेशके आशाकेँ संग एकटा देहकेलेल गलत सम्बन्ध स्थापना भऽगेलैक । उमेशकें आशा सँऽप्रेम भऽगेलनि । आ तहिया सँ सबदिन उमेश सब निक बेजाय आशाकेंसुनाबऽ लगलनि आ आशाकेँ कहलपर चलऽ लगलाह । आशाके कहैछलनि वोहे उमेश करैछलाह । आ उमेश अपन लक्ष्य तक आशाके बुझिलेने रहैथ । आ ओ ईहो सोचिलेने रहैथ जे जीब संगैह आ मरब संगैह । जखन उमेशकऽ बाबजुी उमेशकेँ बखडा अदालत आ मालपोतमेँ जाक उमेशकनामपर कऽ देलनि । तखन किछे दिन बाद उमेश अपन नाम बाला सारा सम्पत्ती आशाके नामपर कऽदेलनि । तकदिरक लिखल आशा उमेशसँऽ बिना पुछने नैहर चैलगेली ताँही सँऽ दुनु गोटाके एकआपसमे मनमोटाब भऽगेलनि । उमेशक उझट बाली सुनि आशा हुनका सँऽ बाजब सेहो बन्द कऽ देलनि । ओ सोच आ चिन्तामे एहन भ गेला कि चञ्चल स्वभावके उमेशक मोन उदाश भ गेलनि ।उमेशकेँ ई दशा देखकऽ उमेशक बाबुजी आ माँ हुनका पुनः अपनालेलनि । भोरक भुतलायल जौ साँझक घर आबेतऽ ओकरा हेयायल नहि कहि बुझिक उमेशके निकसँ राखऽ लगलनि ।उमेशके उदाश रहब देखिकऽ हुनक माँ आ बाबुजी सब हुनका विवाहकेँ वातचित कर लगलनि । विवाहकऽ नाम सुनिते उमेश आशाकेँ वारेमे अनेक वात सोचाए लगलनि । मुदा, उमेश विवाहक बारेमे कनेक देर सोचलनि आ सोचिक पुनः ई दिमागमे अएलनि जे "विवाह जौ कलिअ त आशा त हमरा धोखा देलनि मुदा हम ओकरा किया धोखा दिए ।" ओ फेर सोचलनि हम जौ अखन विवाह कऽ लेब तऽ कल्हिखन जाकऽ हमर कनियाकऽ कोनो प्रकारक इच्छा जौ पुरा नहि कर सकबै त ओकरा मोनमे कतेक किसिमक वात अएतैक । ओ फेर ई सोचला जे "अपन हिस्सा सम्पती त हम बुरालेललहँु आ बाँकी लेल......नहि बाबुजी कि सोच्ता ?" आ, ई वात सोचिक उमेश सब किछ छोरिकऽ सबहक माया मोह त्यागीक घर सँऽ बहुत दुर जाएकें सोचिकऽ चैलदेलाह । जखन उमेश पटना स्टेशन पर पहुचलनि त आगुमे आशा ठाह–रहैक । उमेशकेँ देखक ओ हुनका आर नजदिक अएली आ कहलनि– "उमेश ! आहाँके मनमे होयत जे आहाँके हम बरबाद कऽदेलहँु मुदा ई बाते नहि छैक । आउ आहाँके हम अशल बात सुनबैतछि ,आ बिना सुनने हम आहाँके एतऽ सँऽजाहू नहि देब ।"ई सुनिक उमेश बजलनि "आब सुनला ...कि बाँकी छैक से ?"आशा उमेशके हाथ पकरिक कातमे लजाइछैक आ कहैछै "अहि के लेल .........आहाँके कने समय देबऽ परत ।"कनिक समय सोचैत उमेश कहलनि"— ठिक छै चलु कातमे ।"एकान्त ठाममे जाक दुनु बैसलनि तब आशा कहलनि "सुनु,.....हमरा एकटा परी सँ श्रापित भऽ ई मृत भुवनमे आबऽ परलअछि.....। हम एक दिन गगन—विहारभऽ स्वर्ग जातिरही । बाटमे सपन नामक ऋषि कमण्डलमे जल लऽकऽ पुजा करला जातिरहैथ । हम ऋषिके खौझाव लेल बाटपर आबिकऽ ठाह् भऽ गेलहु आ ऋषीके आखि पर ताकऽ लगलहुँ । हम ऋषी पर आ ओ हमरा पर बहुते देर तक एक आपसमे तकैत रहिगेलहूँ । ऋषी हमरा नजदिक आबऽ लगलनि आ ओ हमरा नजदिक आविक छुबऽ चाहलनि । मुदा हम ऋषी सऽछलिगेलहँु , आ ओ खसिपरला ।" ई ऋषी आ परीक वात उमेशकेँ सुनल नहि गेलनि आ ओ कहला "चुप,.....झुठफुस आ नौटकी कनेक कम बाजु बुझलहु कि नहि,......रे ई सत्ययुग, द्वापर आ त्रेता नहि न छैक ?" मुदा आशा कऽ आँखि आइ सच वाजिरहलछैक ओ फेर कहली " त आहाँ खाली बात सुनिलिअ.......विश्वास करु या नहि करु आहाँ पर अछि । तखन ऋषी हमरा कमण्डलमे सँ पानि लऽ श्राप देलाह " जो, हम तोरा श्राप दैछिऔक कि तोरा स्वर्गक सुख त्यागीकऽ एकटा नहि वल्की दुँटा पुरुशके साथ सम्भोग कर परतौक । जे एकटा तोहर पती रहतौक आ देसर एकटा तोहर परोशके बच्चा । ऋषी फेर कहलनि " ओ बच्चा जखन श्यान भऽ जतैक त तोरा द्वारा ओकर धन सम्पत्ती सबकिछ खतम भऽ जएतै आ जखन तोरा छोरिक ओ चैलजतौ तखन तोहर मृत्यु भऽ तोहर जीवन तृप्त भऽ जएतौ ।" ऋषीक कुवचन सुनिकऽ हम निराश भऽ गेलहु । बड कनलहु ।" आशा वजली ।ई वात सुनऽके इच्छामे आविकऽ उमेश वजलाह–"तव ...........कि भेल ?"उमेशक प्रश्नकेँ जबाब दैत आशा कहली – " हम मृत भुवन अएलहु । आ नदिकातमे आमक गाछलग बसिकऽ सोचऽ लगलहु जे आब कि करु । नदी कातक गाममे एकटा नँया फूसक घर रहैक । हम अप्पन दिव्य शक्ति सँ ओकरा वारेमे देखलहु । हुनका सबकेँ गाममे के ओ नहि चिन्हैत रंहनि । हम अप्पन मायाबी शक्ति सँ हुनका सबकेँ मन वदलीकऽ आ एकटा बच्चकऽ रुपमे प्रवेश कैलहँु । आ, ओ दुनुगोटा हमरा अप्पन बेटी जका मानऽ लगलनि । गामक स्कुलसँ एस.एल.सी. पास कैैलहु । आ तखन ओ सब हमरा कैम्पस मे पढला शहर पढादेलनि । मनोविज्ञानकेँ ज्ञानी तऽ हम रहबे करी । हम मनोविज्ञान सँऽ स्नातक कैलहु आ कैम्पसेमे हुनका हमरा सँऽ प्रेम भऽगेलीन । हुनक माँ विमार रहवाक कारण सँ ओ दुईए महिना वितलाक वाद हमरा सँ विवाह कऽ लेलनी आ साल वितिते हुनक मृत्यु भऽ गेलनी ई त होबहे के रहैक । श्राप अहि प्रकारक रहैक । बहुत दिन बाद हमरा आहाँ सँ सम्वन्ध बनल । ऋषीकऽ बचन अनुसार आँहा बरबाद भऽ गेलहु ।" एतेक बाजिकऽ ओ चुप भऽ गली । ओ फेर कहली– "हमर समयक अन्त भऽ गेल अछि, मात्र दु दिन वाँकि अछि हमर मृत्युकेँ ।ई वात त ओना किनको पचऽ बाला नहिरहैक । मृत्युकऽ नाम सुनिकऽ उमेश बजलाह ".............दु दिन मात्र वाँकीे कोनाक ?""जँऽ आँहा पतियाए चाहैतछि त.........मात्र दु दिन हमरा संगे रैहजाउ । "आशा कहली । उमेश झुठाकेँ नेङ्गराबकेँ विचारमे ओ "ठिक छै" कहला ।उमेश त पहिलदिन बड निकजका आशाक सगं वितएलाह आ एकबेर फेर आशा ओ राति उमेशपर समर्पित कऽ देलनि । उमेशके वस आशाके देह सँ प्रेम रहैक जेना वझाएल । मुदा दोसर दिन उमेशकेँ आशासँ डर लागऽ लगलनि । मँुहपर डर आ चिन्ता देखिक आशा बुझिगेली जे उमेशकेँ पक्का हमर मृत्यु सँ डर लागिरहल छनि । आ, ई देखिक आशा उमेशकेँ तखने ज्ञात करौलनि जे "काल्हिखन सूर्य जखन उदय भऽ जतएतैक तखने हमर समयकऽ अन्त भऽ जाएत ।" जखन हुनका आशा मृत्युक समयके बारेमे ज्ञात करौलनि तखन जाकऽ हुनका मोनमे संतोष भेलनि ।आ, आई राति आशा आ उमेश दुनुगोटा मे सँ किनको निन नहि परिलनि । राति भरि ओ दुनु बितल समय, आ साथे बितल राति सबकेँ वारेमे बतीयाति रहिगेलाह । जखन भोरकें पाँच बजलैक ओ जल्दीसँ जाकऽ नहाएली आ उमेशकेँ कहली– "दुनियामे आठटा मात्र चिरंजीवी पुरुश छथि । जै मे सँ हनुमानजी से हो छथि । हम हनुमान मन्दिर जाइतछी । आहाँ हमरा गेलाकऽ ठिक आधा घण्टाकऽ बाद मन्दिर तर्फ आएब ।"ई सुनिकऽ उमेश लाशकेँ बारेमे पुछला ।हुनका सम्झबित आशा कहली "ओ अपने जरि जएतै" बड अबेर भेल जाइत रहैक । ओ जल्दी सँ निकली । किछ समय बाद ओ एकवेर फेर आविक कहलनि–"उमेश भगवान अहाकेँ कल्याण करौथ ।"उमेशकेँ हुनक बात पर अखनो विश्वास नहि भेलनि ओ आधा घण्टा सँ पहिनही ओतऽ सँऽ निकललनि । जखन हनुमान मन्दिर लग पहुचलाह तँ लोक सवहक बाहरमे भिर लागल रहैक । एकटा आदमी सँ उमेश पुछला जे कि भेलैय ? ओ आदमी बडा उदाश भऽ कहलनि जे मन्दिरमे सँ दर्शन कऽकऽ निकलिते अपनेमने देहमे आगि लागि गेलन । ई सुनिक उमेश लोक सवहक भिरमे पसिक देखलनि त ओत मात्र छाउर बाँकी रहैक । उमेशक मोनमे एकटा अलग उदाशी पकरिललकनि । आ ओ ओत सऽ उदाश भऽकऽ पुनः घर आपस चलिअएलाह । ओ अखनो कतौ बसिकऽ मौन रहैछथि ।