१/२ १.मिथिलाक ध्वज ग़ीत-राग वैदेही भैरव त्रिताल(मध्य लय). २.पथक पथ - गजेन्द्र ठाकुर - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 28 जुलाई 2008

१/२ १.मिथिलाक ध्वज ग़ीत-राग वैदेही भैरव त्रिताल(मध्य लय). २.पथक पथ - गजेन्द्र ठाकुर


मिथिलाक ध्वज ग़ीत- गजेन्द्र ठाकुर












मिथिलाक ध्वज फहरायत जगतमे,

माँ रूषलि,भूषलि,दूषलि, देखल हम,

अकुलाइत छी, भँसियाइत अछि मन।

छी विद्याक उद्योगक कर्मभूमि सँ,

पछाड़ि आयत सन्तति अहाँक पुनि,

बुद्धि, चातुर्यक आ’ शौर्यक करसँ,

विजयक प्रति करू अहँ शंका जुनि।

मैथिली छथि अल्पप्राण भेल जौँ,

सन्ध्यक्षर बाजि करब हम न्योरा,

वर्ण स्फोटक बनत स्पर्शसँ हमर,

ध्वज खसत नहि हे मातु मिथिला।

ई ध्वज गीत नीचाँक संगीत-लएमे गओला उत्तर विशेष प्रभाव प्रदान करत।
Music Notation by Shri Ramashraya Jha "Ramrang" Guru of Shubha Mudgal

राग वैदेही भैरव त्रिताल(मध्य लय)

स्थाई
सां

धसां धप म (-) रे – सा सा सा रे॒ म – प ध प
सां
प ध – ध सां – सां धसां रें – सां सां धसां धप म, धसां धप म (-)

अन्तरा
प ध सां ध सां सां सां ध – रें॒ – मं रें॒ –सां सां सां – ध प म - - प म रे॒ – सा रे॒ – सा सा- रे॒ म - प ध ध सां ध सां- सां रें॒ रें॒ सां सांमप धसां धसां रें॒सां धसां धप म,सां


२। ध्वज-गीत गओलाक बाद लक्ष्यक हेतु प्रयाण करी। ई मूर्ति गौरी-शंकर छन्हि जाहिपर १२०० वर्ष पूर्वक पालकालीन मिथिलाक्षरमे अभिलेख अंकित अछि।


पथक पथ- गजेन्द्र ठाकुर

स्मृतिक बन्धनमे

तरेगणक पाछाँसँ

अन्हार गह्वरक सोझाँमे

पथ विकट। आशासँ!

पथक पथ ताकब हम

प्रयाण दीर्घ भेल आब।

विश्वक प्रहेलिकाक

तोड़ भेटि जायत जौँ

इतिहासक निर्माणक

कूट शब्द ताकब ठाँ।

पथक पथ ताकब हम

प्रयाण दीर्घ भेल आब।

विश्वक मंथनमे

होएत किछु बहार आब

समुद्रक मंथनमे

अनर्गल छल वस्तु-जात

पथक पथ ताकब हम

प्रयाण दीर्घ भेल आब।