आस्था या अंधविश्वास - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 18 फ़रवरी 2008

आस्था या अंधविश्वास

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

करेड़ी वाली माँ

जिनकर मूर्ति स निकले छैन अमृतधारा ....
आस्था आर अंधविश्वास के इ कड़ी म हम आहा के बिच पैन निकले के चमत्कारक चर्चा करब ! जी हाँ, मध्य प्रदेश के शाजापुर जिला स आठ किलोमीटर दूर स्थित करेड़ी गाम म देवी माँ के मूर्ति स लगातार पैन निकैल रहलैन य ! ग्राम वासि के मानब छैन की इ पैन नै अमृत छिये ! हमर किछ दोस्त लोकेन के मुलाकात ओई गाम के सरपंच इन्द्र सिंह स भेलेंन ओ बतेलखिन जे माँ के मूर्ति बहुत प्राचीन छैन ! सरपंच के दावा एता तक छैन कि ओ मूर्ति महाभारत कालीन छिये ! हुनकर कहब छैन कि मूर्ति आराध्य देवी कर्णावती के छियेंन ! कहल्खिन जे माँ कर्णावती दानवीर कर्ण क रोज सौ (१००) मन सोना दैत रहथिन ! जकरा कर्ण प्रजा के भलाई के लेल दान करेत रहथिन ! ओई गामक लोक के कहब छैन कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य सेहो माँ के भक्त रहथिन ! आई कैल इ मंदिर क गाम के नाम स करेड़ी वाली माता के मंदिर कहल जै छैन ! जखन मूर्ति आर पैन के बबाद पूछताछ करल गेलेंन त चंदर सिंह (मास्टर जी) कहल्खिन कि किछ दिन पहिने माँ के मूर्ति स एकाएक पैन निकले लगलैन ! पहिने सभक मानब रहैंन की पैन मूर्ति के स्नान के समय भैर जैत छले जे बाद म निकले छैन, सब मिल क ओई जगह क साफ करलाखिन जै जगह पैन भैर जैत रहे ! मुदा देखल गेल की माँ के बांह के पास बनल एक छेद स वापस पैन भैर गेल ! बहुत बेर पैन साफ करल गेलेंन मुदा दुबारा किछ समय म भैर जैत छालेंन ! तखने स पूरा गाम वासी के कहबाक छैन की ओ पैन नै माँ के प्रसाद माँ के अमृत छिये ! बाद म मंदिर के अन्दर पहुच के देखल गेल की मंदिर के बहार एक बावड़ी (गढा) अछि ओहीठा माँ के मूर्ति के पास बनल एक छेद म पैन भरल अछि ! मंदिर के पुजारी कहलाखिन किछ दिन पहिने आई छेद स अपने आप पैन बहा लागले आर देखते देखैत पास के बावड़ी पैन स भैर गेले ! तखन स लगातार मूर्ति स पैन निकेल रहल छई ! फेर की बात काने कान इ बात पूरा ग्रामीण क पता चललाई तखन स श्रद्धालु के ताता लगातार मंदिर म बैढ़ रहलेंन या ! सभक मानब इ छई जे इ पैन नै अमृत छिये ! जकरा पीने स सब दुःख दूर होइत अछि, सभक कहब छैन जे गाम म बहुत प्राचीन मंदिर छैन ! गाम म जखन जखन नवनिर्माण हेतु खुदाई होई छई त प्राचीन मूर्ति के भग्नावशेष निकले छई !लेकिन पुरातत्व विभाग के ध्यान ओई तरफ नै छैन !मंदिर म खरा रैह क सामने देखल गेल की पुजारी मूर्ति स निकले बाला जल क वितरित केलखिन किछ देर म जल पुनः भैर गेले ! मंदिर पहुचे बला हर श्रद्धालु के कहब छैन की इ माँ के चमत्कार छियेंन ! माँ के मूर्ति बेहद पुरान छैन, आर जमीन म सेहों धसल छथिन! आब सच्चाई की अछि इ त विज्ञाने बतेता ! आई समबंध म अहक सोचब की अछि हमरा बताबू