अजीत झा केर कलम स लिखल कविता अपने सब सेहो पढ़ी । - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 21 जुलाई 2018

अजीत झा केर कलम स लिखल कविता अपने सब सेहो पढ़ी ।



जईर स’ उखरल गाछ जेका हम,
आब कत तक जाऊ यौ,
डाईरह पर फुनगी, फल – फूल सब,
कैना भेटत बुझाऊ यौ,

कर्म-धर्म के रोग-सोग में,
जईरक मईट बिलाई यै,
नव पल्लव के इच्छा में त’,
हरियर पात पताई यै,
बाईरहक मईट जेका बहय छि,
आब त कात लगाऊ यौ,
जईर स’ उखरल गाझ जेका हम,
आब कत तक जाऊ यौ,

चुटी,पिपरी,घोरनक छत्ता,
एक पर एक बुधियैर यै,
सुखल डाईरह के तोईर- छोईर क’,
हरियर में सन्हीयाए यै,
बिना धागा के गुड्डी जैका,
आब कते पताऊ यौ,
जईर स’ उखरल गाछ जेका हम,
आब कत तक जाऊ यौ,
जईर स’ जुरब, मईट में बसब,
मोअन में बहुत फुराई यै,
सतरंगी बसंतक चिंता,
कार्य कठिन बुझाई यै,
गमला में सजल गाछ बनै लै,
सौसे उठल उजाईह यौ,
जईर स’ उखरल गाछ जेका हम,
आब कत तक जाऊ यौ,
- अजीत झा