'मिथिलालोक फाउंडेशन' दिल्ली मे 2 फरवरी सँ शुरू करत मैथिली स्पीकिंग कोर्स - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 24 जनवरी 2018

'मिथिलालोक फाउंडेशन' दिल्ली मे 2 फरवरी सँ शुरू करत मैथिली स्पीकिंग कोर्स

दिल्ली। 24 जनवरी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) मे बसल प्रवासी मैथिल सभकेँ सांस्कृतिक व भाषाई सूत्र मे बान्हबाक लेल गैर-सरकारी संगठन 'मिथिलालोक फाउंडेशन' आगामी दू फरवरी सँ मैथिली स्पीकिंग कोर्स शुरू करे जे रहल अछि। फाउंडेशन मिथिलाक सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक प्रगतिक दिशा मे अप्पन काज आगू बढ़ेबाक लेल एहि तरहक डेग उठा रहल अछि। 

अंग्रेजी भाषाविद् जॉर्ज ग्रियर्सन अप्पन शोध प्रबंध मे दुनिया भरिक मधुरतम भाषाक कोटिमे 'मैथिली' केर गणना केना छथि। जाहिर अछि कि मैथिलीक साहित्यिक प्रचुरता व प्रासंगिकता केर कारण भारत सरकार ऐहिकेँ संविधानक आठम अनुसूची मे शामिल केना अछि। ऐहिक बाद देशक प्रथम श्रेणीक अधिकारी बनबाक लेल संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) केर परीक्षा मे ऐच्छिक विषय केँ रूप मे मैथिली केँ चुनबाक मार्ग प्रशस्त भेल। 


मिथिलालोक फाउंडेशन केँ अध्यक्ष डॉ. बीरबल झा यूपीएससी केँ अभ्यार्थी सभकेँ ध्यान मे राखैत मैथिली स्पीकिंग कोर्स केँ डिजाइन करी मैथिली भाषी छात्र-छात्रा सभक लेल एक नीक पहल केना छथि। खास बात ई अछि कि ई पाठ्यक्रम खासतौर सँ मैथिली भाषी लोग सभक लेल डिजाइन कायल गेल अछि।

आमतौर पर सरकारी व निजी शिक्षण संस्थान सभमे हिंदी, अंग्रेजी समेत आन विदेशी व प्रांतीय भाषा सिखेबाक लेल जे पाठ्यक्रम डिजाइन कायल गेल अछि, ओ ओहि लोग सभक लेल अछि जिनकर ओ भाषा कहियो रहबे नहि करे। लोग सभ या तेँ मजबूरी मे सिखैत छथि वा शौकिया तौर पर।  डॉ. बीरबल झा कहलनि कि "रोजीरोटी केर तलाश मे मिथिलांचल सँ आएल  करीब 50 लाख मैथिल परिवार दिल्ली आओर एनसीईआर मे रहैत छथि। एहि परिवार सभक बच्चा मैथिली लिखब, पढ़ब वा बाजब बहुत कम जानैत अछि, किएक जे हुनका मैथिलीक शिक्षा नहि भेट पाबैत अछि। चूंकि अप्पन भाषाक कोनो व्यक्तिक व्यक्तित्व पर बहुत बड़का प्रभाव पड़ैत अछि, ऐहिक लेल सांस्कृतिक रूप सँ अप्पन जैड़ सँ कटल युवा पीढ़ी केँ मैथिली बाजब सिखेबाक जरूरत अछि।"


मिथिलालोक फांडेशन दू मॉडल मे पाठ्यक्रम डिजाइन केना अछि, पहिल आरंभिक ज्ञान लेल बिग्नर्स कोर्स अछि, जखनकि भाषा मे प्रवीणता हासिल करबाक लेल एडवांस्ड कोर्स तैयार कायल गेल अछि। डॉ. झा कहलनि कि गैर-मैथिली भाषी लोग सभक लेल सेहो एहिठाम अवसर अछि कि ओ एहि भाषा केँ सीख मिथिलाक सांस्कृतिक विरासत सँ रूबरू भ' सकैछ। एहिसँ अंतर-सांस्कृतिक समागम सेहो होयत। 

डॉ. बीरबल झा आगा कहलनि कि जगत जननी सीताक जन्मभूमि मिथिला वैदिक काल सँ ज्ञान-विज्ञानक केंद्र रहल अछि। गुरु-शिष्य परंपरा मे तर्क विद्या, मीमांसा, न्यायिक दर्शन आदिक क्षेत्र मे मिथिलाक अद्वितीय स्थान रहल अछि 'अयाची मिश्र' केँ नाम सँ विख्यात भवनाथ मिश्र केँ ज्ञान आओर दर्शनक चर्चा अक्सर विद्वत्परिषद मे होयत अछि। विपन्नता मे सेहो प्रसन्नता मिथिलाक माटी मे अछि। गैर-मैथिली भाषी लोग एहिसँ परिचित हेता। 

अपने क' बता दी कि डॉ. बीरबल द्वारा संचालित अंग्रेजी भाषा सिखबै बला मशहूर शिक्षण संस्थान 'ब्रिटिश लिंग्वा' एहि बरख अप्पन रजत जयंती मना रहल अछि। निज मातृभाषा मैथिलीक प्रति अगाध लगाव होयबाक  कारण डॉ. झा ऐहिक प्रचार-प्रसार करबाक बीड़ा उठेना छथि।