कुपुरुख : दहेज प्रताड़ना पर अशोक झा उर्फ भोली बाबा केर कलम सँ लिखल गेल एक लघुकथा - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

कुपुरुख : दहेज प्रताड़ना पर अशोक झा उर्फ भोली बाबा केर कलम सँ लिखल गेल एक लघुकथा


माँ...................
माँ...............गै..............
सुनतो नहि छै नै छै बुढ़िया...... 

रौ कि भेलौ.........ऐना कियैक अनघोल मचौने छै?
एँ गै हमहि अनघोल मचौने छी ?
हमरा पर की बितैया से त' हमहि बुझैत छियै
रे जरलाहा, सरधुवा तोरा पर की बितैत छौ रे?

बितैत अछि हमरा पर, तू तेँ केहन बढ़िया खाइत पिबैत छै, तोरा कोनो फिकिर छौ ?
ऐं गै हमरा कोनो फिकिर नहि अछि से तू कोना बुझैत छीह ?
रै चर्हबा, तोरा जे फिकिर रहितौ तेँ इ दिन हमरा सभकेँ नहि देखय परैत
12 हज़ार पेंशन भेटै छौ हमरा महीना के, आ 10 हज़ार महीने महीने 1 तारिक क' कचहरी मे द' अबैत छीही, तै पर सँ 800 टाका ओकील सभ खर्च लैत छौ

तेँ अइ में हम की करू आब??
आब की करबै, जखन ओइ बेचारी के मारि मारैत छलहिन बिना कोनो कसूर के, कतेक बुझा क' कहियौ नै मानलै तेँ ले आब 
आब तेँ जेल सेहो खटे परतौ आ जिनगी बेरवाद भेलौ से अलग स

गै माँ ....... डर होइया कचहरी जाइत
इ डर तखन कतय चली गेल रहौ जखन एकटा अपना पर आश्रित, सब दुःख सुख में संग साथ देबय वाली, पर घरक अबला बेटी पर अत्याचार पर अत्याचार करैत छलही
तेँ की करू माफ़ी माइंग लीयै?
माफ़ी जे मंगबिहि से ओ माँफो करौक ने?
आ मानी ले जे ओकर हिरदय मैथिल ललनाक छै, बड्ड कोमल छै, माँफो क देतौ
मुदा दैब तोरा माँफ नै करतौ

रै................रै जे अबला पर हाथ उठेलक ओ पुरुख भेल ,
ओहो में बिना कसूर के?
आ ओ बेचारी एतेक यातना वेदना तोहर उछन्नर सहियो क एखनो तोरे लेल बरसाइत पाबैन करैत छौ, परंपरा सँ बान्हल एखनो तोरे जिनगीक सलामतिक भीख माँगैत छौ। 
हमरा त अपना कोइख पर ग्लानि होइत अछि 
जे भगवान हमरे कोइख सँ एहन कुपुरुख के कियैक जन्म देलथि।