मिथिलाक लाल सहरसा निवासी 'आलोक रंजन' के भेटतन्हि 'भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार' - मिथिला दैनिक

Breaking

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

मिथिलाक लाल सहरसा निवासी 'आलोक रंजन' के भेटतन्हि 'भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार'

सहरसा। 23 दिसम्बर। भारतीय ज्ञानपीठ केँ निदेशक लीलाधर मंडलोई द्वारा प्राप्त जानकारी केर मुताविक भारतीय ज्ञानपीठ केँ नवलेखन पुरस्कार योजना केर अंतर्गत बरख 2017 लेल देल जाय बला पुरस्कारक लेल वरिष्ठ  लेखक, पत्रकार विष्णु नागर केर अध्यक्षता मे गठित निर्णायक समिति द्वारा सर्वसम्मति सँ आलोक रंजन केँ दक्षिण भारत पर केंद्रित यात्रा - वृतांत केर पांडुलिपि क' देबाक निर्णय कायल गेल अछि। 

अपने क' बता दी ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार सँ पुरस्कृत लेखक क' 50 हज़ार टाका नगद पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र आओर वाग्देवी केर प्रतिमा प्रदान कायल जायत अछि। पुरस्कृत पांडुलिपि क' भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित सेहो कायल जायत। 

स्थानीय कृष्णा नगर वार्ड नंबर 23 निवासी बनगाँव संस्कृत कॉलेज केँ व्याख्याता प्राप्त प्रभाष चंद्र झा केँ पुत्र आलोक रंजन मूल रूप सँ सोनवर्षाराज प्रखण्डक बड़गांव निवासी छथि।