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स्थान आ गामक नामक इतिहास, भूगोल आ भाव-भूगोल

डॉ. कैलाश कुमार मिश्र

 सविता झा खानक  एक लघु जिज्ञासा जे दीर्घ बहस के जन्म दैत अछि, छल: “ अंधरा-ठाढ़ी गामक नाम में अंधरा शब्द आंध्र सं सम्बंधित अछि की?”

एहि सबाल के बहुत हल्लुक आ गंभीर प्रतिक्रिया एनाई शुरू भ गेल। किछु लोक बहकल जबाब देलनि त गंभीर लोक ओकरा सम्हारैत ठीक केलनि। इतिहासकार सं साहित्यकार सब जुटि गेलनि।
एहि प्रश्न केर अन्तिम निष्कर्ष ई भेल जे चूँकि राजानृग(आन्हर)के राजधानी छलै ठाढी तैं नामकरण एहन भेल (डॉ. उषा किरण खान)। एहि बात के स्पष्टीकरण दैत इशनाथ झा लिखैत छथि:“पंडित वाचस्पति मिश्र नृग नामक राजा केँ अपन आश्रयदाता कहैत छथि जेदशम शताब्दी मे आंध्रप्रदेश सँ सेनासहित आबि एतय राज्य स्थापित केने छलाहआ नाम छल --- आंध्रस्थली। वाचस्पति राजपंडित छलाह। कालक्रमे अपभ्रंशभेल अन्हराठाढ़ी। जखन.दू टोल मे विभक्त भेल अन्हरा आ ठाढ़ी!”

हमरा भेल, अहि पर बहुत किछु करबाक जरुरत अछि। कनि-मनि अपन जिज्ञासा आ विषय के ज्ञान के कारण हमरो भेल जे किछु लिखी।  गाम अथवा शहर केर जतेक निक इतिहास ततेक निक ओकर नामक इतिहास। नामक इतिहास बहुत अर्थ में स्थानक इतिहास सं पैघ आ गूढ़ चीज़ होइत छैक।  अंग्रेज सब जखन भारत केर जनगणना के प्रारंभ केलक त ओकरा संगे विभिन्न तरहक जाति, कला, आदिक संग गामक एवं स्थानक नाम आ नामकरण के इतिहास, किम्बदन्ति, फोकलोर, आ ओकर तथ्य पर सेहो काज शुरू केलक. एहि परंपरा के बाद में बहुत प्रश्रय नहि देल गेल। यद्यपि किछु मानवशास्त्र, भूगोल  विद्वान व्यक्तिगत रूपेँ लागल रहलनि। राँची विश्विद्यालय के मानवशास्त्र केर विद्वान प्रोफेसर ललिता प्रसाद विद्यार्थी भारत के किछु शहर के नामकरण पर एक पोथी लिखला। गया शहर के नामकरण, एकर महत्व आ पवित्र पर एक पोथी लिखलनि "Sacred Complex of Hindu Gaya".  Anthropological Survey of India के पूर्व निदेशक आ शान्तिनिकेतन केर कुलाचार्य प्रोफेसर सुरजीत सिन्हा अपन एक टीम बना ओहि में प्रोफेसर बैद्यनाथ सरस्वती, प्रोफेसर महापात्रा, प्रोफेसर G. S. Negi आदि के सहायता सँ बनारस के नामकरण, बनारस के घाट, पंडित, सन्यासी आ विधबा पर बहुत नीक काज केलनि। बनारस हिंदू विश्विद्यालय के भूगोल शास्त्र के विद्वान प्रोफेसर राणा पी बी सिंह आ राँची विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर माखन झा सेहो एहि तरहक काज केलनि। माखन झा के काज जनकपुर पर ठीक ठाक छनि।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजय शंकर सहाय (आब सेवानिवृत्त) सेहो एहि विषय पर नीक काज क रहल छथि। गँगानाथ झा संस्कृत शोध संस्थान इलाहाबाद के निदेशक प्रोफेसर गया चरण त्रिपाठी जगन्नाथ पुरी के मंदिर प्रांगण, पूजा पद्धति, आदिवासी आ ब्राह्मण (सबरा आदिवासी आ ओड़िया ब्राह्मण) के बीच शेयर्ड फोकलोर, पूजा पद्धति, कला, आदि पर बहुत सूक्ष्म काज केने छथि। हुनकर पोथी, "Communication with Gods" एक आश्चर्यजनक काज अछि।

 प्रोफ़ेसर नागस्वामी, "बृहदेश्वर केर मंदिर प्रांगण" पर, किछु विद्वान वृन्दावन के प्रसिद्ध मंदिर "गोविन्ददेव" जकर निर्माण मानसिंह द्वारा करायल गेल छल पर काज केने छथि।

 श्रीवत्स गोस्वामी (बृन्दावन शोध संस्थान)  ब्रजप्रकल्प,  56 भोग आ समस्त ब्रज महिमा पर अभूतपूर्व काज क रहल छथि। अहि तरहक अनेक काज अछि जे भूगोल सँ आगा बढ़ि भाव-भूगोल दिस चर्च करैत अछि।

भारतीय गाम आ शहर के नामकरण में महाभारत आ रामायण के बहुत नीक भूमिका भेटत। कुरुक्षेत्र, करनाल, इंद्रप्रस्थ, गुरुग्राम (गुरगांव), अंग, गंधार (कंधार), आदि महाभारत सँ संबंधित नाम अछि। उज्जैन लग एक जगह छैक नागदा। कहल जाइत छैक परीक्षित के सांप कटला बाद अर्जुन सब सांप के एक ठाम एकत्रित के जरा देलथिन। नाग दहलैक तांहि नागदा भेलैक।
तहिना रामायण सँ अयोध्या, लंका, मिथिला, जनकपुरी, सीतामढ़ी, आ ने जानि की की स्थान व्याप्त अछि। तुलसीदास के समय वाराणसी में रामायण में वर्णित प्रदेश आ क्षेत्र के नाम पर जगह के नाम राखल गेलैक। मिथिला में अनेक गाम आ स्थान के नाम रामायण सँ लेल गेल अछि। एहि पर चर्च थोड़ेक काल बाद।

 बृन्दावन सँ बरसाने के बीच एक गाम छैक "संकेत"। संकेत के राधा के नैहर मानल जाइत छैक।

एकरा अलावे अनेक चीज़ पर नामकरण होईत छैक। मध्य प्रदेश में एक जगह छैक "मंदसौर"। एक समय में ई बहुत पैघ व्यवसायिक शहर छलैक। एकाएक व्यवसाय में मंदी आबि गेलैक। भेलैक जे सूर्य आब जेना रुसि रहलथिन आ मंद भ गेलथिन। लोक आब एहि स्थान के छोड़ि आन ठाम पलायन कर लागल। मंदी सँ एकर नाम मंदसौर भ गेलैक।

 रांची के अगल-बगल में अदौ सँ लौह अयस्क भेटैत छैक। ओतै केर आदिवासी रौट (wrought iron) के निकालबाक आ व्यवहार के कला में माहिर छ्ल। मुंडा जनजाति केर भाषा मे लौह अयस्क के अर्चि कहल जाइत छैक जे बाद में राँची भ गेलैक।

सिमडेगा सँ थोड़ेक दूर एक गर्म झरना छैक। जतय पाथर केर।चूल्हा बनल छैक। एकरा बारे में एहेन मान्यता छैक जे वनवास के समय सीता जी अतै  रुकल छलि आ भोजन बनबैत छलि। एकरा "रामरेखा धाम" कहल जाइत छैक। एहनो मान्यता छैक जे बानर दल में ओरांव आदिवासी सेहो छ्ल। ओ सब राम के बहुत प्यार सँ "ओ राम, ओ राम" कहैत छ्ल
 बाद में आकर नाम ओराम भ गेलैक जे आई अपभ्रंष भ "ओरांव" भ गेल छैक।

राजा उदय प्रताप सिंह के नाम सँ उदयपुर; जय सिंह के नाम सँ जयपुर बनल अछि। राजस्थान में एक राजा छलाह - महाराजा बिक्रम सिंह। हुनका लोक प्यार सँ बिका कहैत छलनि। बिक्रम केर एक प्रिय भील गड़ेरिया - नेरा- छलनि। बचपन के मीत सेहो। एक बेर बीका के विपत्ति एलनि। राज पाट किछु दिन लेल हाथ सँ चलि गेलनि। घनघोर जंगल मे नुकायल रहलनि। ओहि समय मे नेरा हुनकर सब तरहे मदति केलकनि। बाद में बिका के दिन घुरलनि। एक पैघ शहर अपन राजधानी लेल बनेलनि। ओहि शहर के नाम अपन नाम आ नेरा के नाम सँ मिला क रखलनि - बीकानेर। दुनू अमर भ गेला।

चंडी देवी के नाम पर चंडीगढ़; श्यामला देवी के नाम पर शिमला; नैना देवी के नाम पर नैनिताल केर नाम परल अछि।
कन्नड़ भाषा मे उडु के अर्थ घर होईत छैक। अतै बँग्लादेवी के नाम पर बंगलुरू; माँगलादेवी के नाम पर मंगलुरू बनल अछि।

 आब मिथिला दिस आबी। मिथिला में अनेक गामक नाम रामायण पर अछि। सौराठ के लोक सौराष्ट्र केर अपभ्रंश मनैत छथि। सौराष्ट्र केर अर्थ भेल एक सौ राष्ट्र। कहल जाइत अछि जे सीताक स्वयंवर सौराठ में भेल छलनि। मान्यता के हिसाबे 100 राष्ट्र के राजकुमार ओहि में आयल छला।

सीताक स्वयंवर में सात लाख आदमी दर्शक छलथि। हुनका सबके एक स्थान में रहबाक सामुदायिक व्यवस्था कैल गेल छ्ल। ओ स्थान रहिका सँ उत्तर सतलखा अछि।
राजा जनक के भाई छलथिन कनक। हुनक आश्रम जतय छलनि तकरा कनैल कहल जाइत छैक। शिबजी के धनुष जकरा राम भंग केलनि से सौराठ सँ दक्षिण दिशा में राखल गेल रहैक। आई ओहि स्थान पर धनुखी नामक गाम बसल अछि।

 सीता प्रतिदिन मंगलबनी नामक फ़ुलवारी में फूल लोढय अपन सखि बहिनपा सँग जाइत छलि। ओ मंगलबनी आब मंगरौनी भ गेल।

तहिना वैदिक समय के एक पैघ ऋषि उत्तिष्ठ एक सिद्धपीठ में तपस्या करैत छलनि। हुनकर नाम पर उत्तिष्ठ पीठ बनल जे बाद में अपभ्रंश में उचैठ भ गेल।

 जखन बज्रयान के समय मे बौद्ध भिक्षु सब नेपाल देने भारत मे (मिथिला) में प्रवेश केलक त कतेक तंत्र क्षेत्र बनल। धामि, भगता आदि के प्रभाव भेलैक। एक पूरा धामि के पट्टी बनल जकरा आई काल्हि धमियापट्टी कहल जाइत अछि।

 एक एहेन गाम जे धनगर खेत सँ भरल छ्ल। पर्याप्त मात्रा।में।नदी कर जल उपलब्ध छलैक। भूसा के ढेरी देख एकर नाम।भुसकौल पड़ि गेलैक। भुसकौल दरभंगा तरसराय के बीच ककरघाटी रेलवे स्टेशन लग एक सुव्यस्थ गाम अछि।

युद्ध के समय एक ठाम रथ के पहिया अर्थात "रथिका" बनैत छ्ल जकर प्रयोग युद्ध भूमि में होईत छलैक। रथिका बाद में अपभ्रंस बनि "रहिका" भ गेल।

अहिना एक गाम अछि नागदह। नागदह डॉ शुभद्र झा के गाम अछि। एहि गाम के नागदह होबाक एक आश्चर्यजनक दंतकथा छैक। मान्यता छैक जे कहियों एहि गाम में एक महिला गर्भवती भेली। जौं-जौं हुनकर प्रसव के समय नजदिक भेलनि तौं-तौं हुनकर शरीर स्याह भेल गेलनि। जखन बच्चा भेलनि त मनुखक बच्चा के बदला एकटा नाग जन्म लेलकनि। जन्म लैत नाग खेत आ जंगल-झाड़ दिस भागि गेल। ई महिला आब ठीक भ गेली। बाद में हुनका दू पुत्र जन्म केलकनि। जखन बेटा पैघ भेलनि त दुनू भाई अपन जमीन आ सम्पति के बटबारा करे लगलनि। दू टा ढेर बनायल गेल। मुदा ढेर अपने मोने 3 भ जैक। पंच सब परेशान। बाद में हुनकर माय कहलथिन: "देखू, अहाँक एक भाई नाग छथि। तांहि तेसर कुड़ी हुनकर बनि रहल अछि। अहाँ सब हुनकर आराधना करु।"

मायक बात मानि दुनू भाई हाथ जोड़ि नाग के आराधना केलथि। नाग आबि तेसर कुड़ी में बैस रहल। बहुत दिनक बाद ओ नाग मरि गेल। नाग के मनुख जकाँ अग्नि संस्कार कैल गेल आ ओहि स्थान के पवित्र मानि गामक निर्माण कैल गेल। तांहि एहि गामक नाम पर्ल नागदह।

कपिलेश्वर के बारे में कहल जाइत अछि जे कपिल मूनि एहि लिंग के स्थापना अपने हाथें केलनि। कपिल के ईश्वर ताहिं कपिलेश्वर।

हम 1997 सँ 2002 धरि UNESCO Chair केर फेलो रही आ UNESCO-UNDP आ भारत सरकार के सहयोग सँ करीब 100 गामक अध्ययन केने रही। बाद में 100 गाम के हमरालोकनि 14 विभिन्न नाम सँ वर्गीकृत कैल:

1. पहिल गाम: अरुणाचल में एक गाम छैक "आदि"। आदि सँ भारत शुरू होइत छैक तांहि ओकर नाम "पहिल गाम"।
2. अंतिम गांव:  उत्तराखंड में माना नामक गाम छैक। ई गाम अंतिम गांव छैक। एकर बाद चीन शुरू भ जाइत छैक।
3. भूदान गाम: भूदान गांव ओहेन गाम छैक जे जमीन विनोबा भावे के लोक श्रद्धा सँ दान में द्वलथिन।
4. कला ग्राम: अहि के अंतर्गत ओहेन गाम अछि जे कुनो ने कुनो कला के लेल जनल जाइत अछि।
5. विद्वानक गाम: मिथिला सँ सौराठ, सरिसब पाही, महिसी  आदि गाम एहि श्रेणी में अबैत अछि। एहि सब गाम के कम सँ कम हज़ार वर्ष के इतिहास छैक।
6.  हार्ड (कठोर) गाम: किछु एहेन गाम भेटल जतय बहुत दिन सँ लोक में आपसी झंझट, खुना-खूनी के माहौल रहैक। माओ नक्सल के प्रभाव आदि। चारु दिस शान्तिक अभाव। एहेन गाम के हार्ड गाम के श्रेणी में राखल गेल।
7. सॉफ्ट (मृदुल) गाम: जहानाबाद में एक गाम एहेन भेटल जकरा अगल बगल में बहुत रक्तपात होईत रहैक, नक्सली हिंसा, रणवीर सेनाक आक्रमण, मुदा ताहि सब घटना के कुनो दुष्परिणाम एहि गाम पर नहि रहैक। गामक लोक कतेक सौ साल सँ आपसी प्रेम, आ भ्रातृत्व में रहैत आबि रहल छलनि। एहेन गाम आनो ठाम भेटल। एहि तरहक गाम के सॉफ्ट गामक श्रेणी में राखल गेल।

8. पर्यावरण सँ सुसज्जित गाम: किछु गाम अरुणाचल, सिक्किम आ हिमाचल में एहेन भेटल जे प्रकृति सँग तारतम्य स्थापित करैत च्छ्ल। पुड्डुचेरी में नलबद्दु नामक मल्लाहक एक गाम गेल रही। ओतै केर माल्लाह समुद्र सँ माछ मारि ओकरा बेचि अपन गुजर करैत अछि। गामक माल्लाह समुद्र के बालू के रंग देखि बुझि जाइत अछि जे कतेक काल मे कतेक बेग आ कुन दिशा सँ कतेक प्रलयंकारी तूफ़ान आबि सकैत अछि। अपन।अहि ज्ञानक कारणे ओ सब आई धरि कोनो तरहक भीषण दुर्घटना के शिकार नहि भेल अछि। समय रहैत अपना के समुद्र सँ बाहर आनि लैत अछि, नाव के कात क लैत अछि।

9.  जंगली जड़ी-बूटी आ औषधि सँ युक्त गाम: केरल, सिक्किम में किछु एहेन गाम भेटल जकर सब लोक जड़ी-बूटी के संकलन में लागल छ्ल आ ओकर ज्ञान आ व्यवसाय सँ अपन जीविका चलबैत छ्ल।

अहि तरहे अहुँ सँ लोक बहुत तरहक गाम आ ओकर संस्कार के लोककंठ सँ  बजैत अछि।
कहबाक तात्पर्य ई जे गामक नामकरण पर सामाजिक, लोक परम्परा, इतिहास आदि के साथ लय एकिकृत भ काज करबाक आवश्यकता अछि। एहि सँ बहुत रोचक जानकारी भेट सकैत अछि।

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