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सोनपुर। 04 नवम्बर। देशक विभिन्न हिस्सा सँ आनल गेल हाथी सभसँ हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला केर हाथी बाजार ठसाठस भरल रहैत छल, लेकिन आय इ ऐतिहासिक बाजार म' आँगुर पर हाथी केँ गिनती होयत अछि।

इतिहास साक्षी अछि कि मुगल शासक औरंगजेब सेहो युद्ध म' काज आबै बला हाथी एहिठाम किनने छला, तखन इ बाजार नारायणी नदी के घाट पर बहुत दूर धरी पसरल रहैत छल। आजादी केँ बाद देशक अनेको हाथी पालको, कैको बड़का मठ सभक महंत आर व्यापारि सभ द्वारा एहिठाम हाथी आनबाक सिलसिला कायम छल।

अपने केँ बता दी आब एहिठाम हाथी सभक खरीद बिक्री सरकार केर कठोर  कानून के कारण नहि कायल जायत अछि। आब एहिठाम हाथी ख़रीद बिक्री के बदला उपहार स्वरूप भेंट देल जायत अछि। मेला प्रेमि सभक मानी तेँ हाथी एहि मेला केँ सिर्फ रौनक आर शान नहि बल्कि धार्मिक परंपरा केँ एक पहचान सेहो छल। ऐना म' हाथी बाजार क' आर कोना विकसित कायल जाय एहि पर सरकार क' विचार करबाक चाहि।

सोनपुर निवासी व कांग्रेस केँ जिला उपाध्यक्ष रामविनोद सिंह कहला कि वर्ष 2000 के बाद एहि मेला म' हाथी सभक संख्या म' लगातार गिरावट देखल गेल अछि l पशु क्रूरता अधिनियम आर कानूनी पेचीदगि सभक कारण हाथी पालक ऐता अप्पन हाथी क' आनबा सँ कतरैत छैथ। सोनपुर सवाईच केँ हाथी पालक सुनील दुबे कहला कि हरिहर क्षेत्र मेला अवधि तक एहि नियम क' शिथिल रखबाक चाहि ताकि पशु पालक बेधड़क अप्पन हाथी एहिठाम आनैथ।

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