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सहरसा। 06 अक्टूबर। बिहार केर सभ प्रसिद्ध शक्तिस्थल म' सहरसा जिला केँ महिषी गाम म' अवस्थित उग्रतारा स्थान प्रमुख अछि। मंडन मिश्र केर पत्नी विदुषी भारती सँ आदिशंकराचार्य केर शास्त्रार्थ एतहि भेल छल जाहि म' शंकराचार्य पराजित भेल छलाह। सहरसा मुख्यालय सँ 16 किलोमीटर दूर इ शक्ति स्थल पर साल भरी श्रद्धालु सभक तांता लागल रहैत अछि,  लेकिन नवरात्र के दिन आर प्रति सप्ताह मंगलवार दिन क' एहिठाम श्रद्धालु सभक बहुत भीड़ होयत अछि।

शक्ति पुराण केँ अनुसार माहामाया सती केर मृत शरीर ल'क' भगवान शिव पागल जोका ब्रह्मांड म' घुमैत छलाह। एहि सँ होय बला प्रलय केर आशंका क' देखैत भगवान विष्णु द्वारा माहामाया केर मृत शरीर क' अप्पन सुदर्शन सँ 52 भाग म' विभक्त क' देल गेल छल। सती केँ शरीरक जे हिस्सा धरातल पर जाहिठाम गिरल ओहि क' सिद्ध पीठ केर रूप म' प्रसिद्धि भेटल। महिषी उग्रतारा स्थान केँ संबंध म' एहेन मान्यता अछि कि सती केर बायां नेत्र भाग एतहि गिरल छल।

मान्यता इयो अछि कि ऋषि वशिष्ठ उग्रतप केर बदौलत भगवती क' प्रसन्न केलन्हि। हुनक प्रथम साधक केर एहि कठिन साधना केर कारण सँ  भगवती वशिष्ठ अाराधिता उग्रतारा केर नाम सँ जानल जायत छथि।  उग्रतारा नाम केर पाछा एक मान्यता इयो अछि कि माता अप्पन भक्त सभक उग्र सँ उग्र व्याधि सभक नाश करैत छथि। जिस कारण भक्त सभ द्वारा हुनका उग्रतारा नाम देल गेलन्हि।

महिषी म' मैया भगवती तीनों स्वरूप उग्रतारा, नील सरस्वती एवं एकजटा रूप म' विद्यमान छथि। एहेन मान्यता अछि कि बिना उग्रतारा केर आदेश सँ तंत्र सिद्धि पूरा नै होयत अछि। इये कारण अछि कि तंत्र साधना करै बला लोग एहिठाम अवश्य आबैत छैथ।

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