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अभिवादन वा समाचारक व्यवस्थित संवहनक आदान-प्रदान भारतीय संस्कृति, सामाजिक जीवन तथा व्यक्तिगत जीवनक महत्वपूर्ण उपादान थिक । प्रत्येक व्यक्तिक दिनचर्याक अभिन्न एवं अनिवार्य हिस्सा थिक । अभिवादनक प्रगटीकरणक स्वरूप जे किछु हो परन्तु भारतीय समाज मे विशेषरूपेण सांस्कृतिक दृष्टिकोण सँ एहि महत्वपूर्ण एवं प्राचीन परंपरा कें सदैव गौरव प्राप्त होइत आबि रहल अछि । अभिवादनक स्वरूप तथा व्यक्त करबाक अवस्थाक जे किछु प्रकार हो, परन्तु अभिवादन वस्तुतः आध्यात्मिकताक सर्वश्रेष्ठ संस्कार थिक ।

आभिवादन केवल शब्द द्वारा व्यक्त औपचारिकताक अभिव्यक्ति मात्र नहि अपितु भावना प्रगृटिकरणक पवित्र एवं महत्वपूर्ण अवस्था थिक जकरा माध्यम सँ परस्पर श्रेष्ठ तथा कल्याणकारी संवादक आदान-प्रदान, आन्तरिक अशांति कें परम शांति मे परिवर्तित कय चित्त आओर चेतना कें शीतलता प्रदान करैत अछि । श्रेष्ठ कें विनम्र सम्मान कयला सँ वा अभिवादन कयला सँ सम्मान केनिहार व्यक्तिक संस्कार प्रसादिक बनैछ । अभिवादन व्यक्तिक आभूषण थिक । अभिवादन व्यक्तिक आचरण कें संस्कारित करैत अछि एवं एक-दोसरक भावनात्मक संबंध कें भव्य बनवैत अछि ।

भारतीय संस्कृति व्यक्तिक विविध साधनाक सर्वोत्तम परिणति थिक । समस्त दृश्यमान विरोध उत्पन्न भेला उपरान्तहुँ सामंजस्य स्थापित करबाक अनुपम चिंतन थिक । भारतीय जनमानसक विभिन्न प्रकारक साधनाक सर्वश्रेष्ठ परणति कें भारतीय संस्कृति कहबा मे कोनो प्रकारक अतिशयोक्ति नहि बुझल जेबाक चाही । वस्तुतः एहि प्रकारक चिंतनक आश्रय सँ विभिन्न प्रकारक समस्याक समाधानक मार्ग सहजतापूर्वक संभव भऽ सकैत अछि । भारतीय इतिहासक वर्णित अंश कें जतबा बुझल जा सकैत अछि, एकर अपेक्षा जतेक नहि बुझल जा सकैत अछि ओ अंश आओरो अधिक महत्वपूर्ण अछि । अनेकों जातिक समूह एवं धर्माम्लम्बी एहि भव्य भारतक अनिवार्य हिस्सा बनैत सर्वश्रेष्ठ योगदान दय, व्यवस्थित तथा समृद्धशाली परम्परा कें स्थापित करैत जन्मभूमिक प्रति समर्पण, वस्तुतः सांस्कृतिक समृद्धि कें सशक्त बनेवाक अद्वितीय योगदान थिक ।

हमरालोकनिक संस्कार ईश्वर प्रदत्त नैसर्गिक संस्कार थिक । विश्वक सर्वश्रेष्ठ देश भारतवर्ष मे उत्पन्न भऽ अपना आप कें भाग्यशाली तथा गौरवशाली अनुभव करैत छी । एहि हेतु हमरालोकनिक पावन कर्तव्य बनैत अछि जे जन्मभूमिक प्रति सदैव समर्पित भाव सँ सर्वस्व अर्पण करबाक हेतु सतत् तत्पर रहि एवं भारतीय संस्कृतिक अनमोल धरोहर कें हृदय सिंहासन पर अवस्थित कय समस्त देशवासीक प्रति स्नेह, करूणा, अपनत्व एवं कुटुम्ब-परिवार बुझि प्रेमपूर्वक तथा निश्छल भाव सँ श्रद्धा, स्नेह एवं श्रेष्ठ क प्रति आदरभाव रखैत भारतीय संस्कृतिक रक्षार्थ स्वयं कें समर्पित करी । इत्यलम् । जय श्री हरि ।

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