बीहनि कथा (एक टूकरी रोटी) - वी०सी०झा "बमबम" - मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

बीहनि कथा (एक टूकरी रोटी) - वी०सी०झा "बमबम"

~ कनियाँ छी यऽई ? यऽई रतनपुर बाली कनियाँ कतय छी यऽई ?
~ आबौथ - आबौथ बैसौथ ! कतय जेबय हम आंगन स घर आ घर संऽ आंगन !

~ हे एक रत्ती इ धऽ राखू कने !
~ कथि लऽ एते करऽ लगलखिन ! नय होयतहि कि भऽ जयतहि से कहौत तऽ ?

~ कहाँ किछ केलिए ! करय द्वारे , के करत ? चिक्कस सानले छोड़ि देलिए चारिटा मांछ कोनो ना उनटा - पूनटा देलिए !
~ एह तहियो इ कहाँ ककरहु छोरलखिन ?

~ एंऽ यऽई अहियव - सोहियव के  एक  टूकरी रोटी आ दूटा मांछ नहि दितियैक ? पावनि कि सब दिन होइत छैक ? फेर फोंरके साल सब नीकें ना रहलय त ! केनिहारि द्वारे नहि तऽ हम सगर टोल मे एकटा के - - - -
~ किआ हिनकर बुच्ची तऽ आब बेस काज करऽ बाली भऽ गेलखिन !

~ धूर जाउ ! ओकरा एक सेर मरुआ के चिक्कस तऽ पिसे नहि भेलय ! एखन जे ककरहु - ककरहु दऽ अवितय से परेलय छौड़ी सब संगे कोमरहु !
~ अच्छऽ जाय देथुन कि हेतय ओहु लाथे तऽ एलथि हमर आँगन - घर ओना तऽ इ एबो नहि करैत छथि !

~ कि आयब कनियाँ हमर पुरुखे नहि तेहन छय ! कतहु जे निकलब से - - - एखनु मोन उड़ले अछि !
~ हौथ कि करथिन एहिना होइत छय सबहक घर मे !

~ अच्छ कहलहु जे जोखना माय घर संऽ दओ गेल रहय कि ?
~ जाउथ ओ कि देतय ,ओकरा त अपने ततेक झउआ - पउआ छय जे 'उगह चान कि लप'क पुआ' भ जाइत छय !
आ फूदनि माय'क घरक तऽ मूंह मे नहि लेबऽ जोगरक छलहि , बुझौत जे फेकले गेलय सबटा !

~ जाउ ओ सब कि देत पहिने अपने खा लउ तखन दोसर के दिहउ !
~ से ठीके कहैय छथिन 'अपने खा ले नाड़ि तखन बेन बिलहिऐं' हाऽऽऽऽ

~ हे आब जाय दियऽ कने - कने सबहक आँगन ने देवाक अछि एक टूकरी कऽ !
~ हं हिनका जकाँ के करत आय काल्हि मे एकटा इहय छथि जे सबके - - - - -

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