0
बकरीदक् कहानी महत्व इतिहास:---

 बकरीद कS  कहानी महत्व इतिहास अउर सच जानै के लेल एक बेर ज़रूर पढ़ी |
बकरीद इस्लाम धर्म कS सबसँ ज्यदा मानाबै वला  मS सँ एक पाबैन छी।
एक जश्न अउर उल्लाश कS तरह मनाबै वाला एक रीती अइछ,जे मुस्लिम धर्म मनाबै अइछ |

इ समय में बजारक भाव बैढ़ जाइ अइछ,सब किछक भाव आसमान छुओ लागै अइछ।
एकर बाबजूद भी मुस्लिम धर्म ना -ना प्रकार के चीजक साथ अपन जश्न कs बरकरार राखै अइछ|
मुदा ऐ सबसँ बैढ़ कS बकरीदक दिन कुर्बानी कS लेल याद राखल जाइ अइछ।

ए दिन इस्लाम सँ जुरल हर वो शख्स खुदा कs सामने अपन सबसँ करीबी कS कुर्बान करैत अइछ।
इहे  ईद-उल-जुहा के नाम से जानल जाइत अइछ |

इ साल 2016 में बकरीद 13 सितम्बर को मनाईल गेल !!| एकरा खाश तौर पर हजक बाद इस्लामकि संस्कृति में कएल जाइत अइछ|

इस्लामिक कैलंडर कs  अनुसार इकर शुरुवात 10 धू-अल-हिज्जाह सँ चलैत अउर खत्म 13 धू-अल-हिज्जाह पर भेल|
अहि तरह इ इस्लामिक कैलंडर कs बारहवे माह के दसवे दिन मनायल जाइत अइछ|

बकरीद कS महत्व :---

बकरीदक दिन फर्ज-ए-कुर्बान कs दिन होयत अइछ :-

खाश कs सब गोटे जानैत हेबै की बकरीदक दिन बकरा कs कुर्बानी देल जाइत अइछ |

 मुस्लिम समाज मs बकरा कs पालल जाइत अइछ,नै रहै अइछ तह 10 दिन पहिने खरीद कs बकरा के खिया पीया कs तगड़ा कएल जाइत अइछ अउर बकरीदक दिन ओय बकरा के अल्लाह के लेल कुर्बान कs दैत अइछ।
जेकरा फर्ज-ए-कुर्बान सेहो कैह सकै छी।

की अहाँ सब जानैत छी ए दिनक शुरुवात कोन तरहे सँ भेल??

बकरीद की कहानी इतिहास :--

इ इस्लामिक त्यौहार कs  पीछे एक एतिहासिक तथ्य छिपल अइछ,जाइ मs कुर्बानी कs एहन दास्तान अइछ जे सुइन कs हृदय काँइप जायत।
 बात ओय हजरत इब्राहीम कs अइछ,जे अल्लाह कs बंदा मानल जाइत छल।
जयकर  इबादत पैगम्बर कs तौर पर कयल जाइत अइछ|
जिनकर हर एक इस्लामिक द्वारा अल्लाह कs दर्जा प्राप्त अइछ, जेयकरा ए औदे सँ नवाजल गेल।
जेकरा खुद खुदा ने इम्तहान लेलक।

बात कुछ एहन अइछ  : खुदा ने हजरत मुहम्मद साहब के इम्तिहान लै के लेल हुनका आदेश देलक की तखने वो प्रसन्न हेत  जखन अपन बेइंतहा अज़ीज़ के अपन अल्लाह कs सामने कुर्बान करत| तखन  हज़रत इब्राहीम ने कुछ देर सोइच कs इ  निर्णय लेलक और अपन अज़ीज़ कsकुर्बान  करै के तय कएलक।

सब गोटे इ जानह चहलै की हज़रत इब्राहिम कs कोण चीज सबसँ अधिक चहेती अइछ,जेयकरा आई कुर्बान करह चाहैत अइछ|
 | तब हुनका पता लगलै की ओ चहेती अनमोल चीज हुनकर बेटा हज़रत इस्माइल अइछ।जे आई अल्लाह के लेल कुर्बान करैत अइछ|
इ बात जाइन कs सब भौचक्का भS गेल|

कुर्बानी कs समय करीब आइब् गेल | इस्माइल कs कुर्बानी के लेल तैयार कएल गेल, अपन बेटा के कुर्बानी देनाइ अटेक आसान नै छल।मुदा अजरत इब्राहिम कs अपन अज़ीज़ कs कुर्बान  अदा करबा के छल ,आब की करत आँइख में पट्टी बांइन्ध कs अपन बेटा कs कुर्बानी देलक |

जखन हजरत इब्राहिम अपन बांधल आँइख पर सँ पट्टी हतेलक ,तब देखै अइछ देल गेल कुर्बानक जगह पर बकरा कुर्बान अइछ।

अल्लाह खुश भS कs इस्माइल के जान बख्श देलक और बकरा के कुर्बान कबूल कएलक।
तखने सँ इ कुर्बानी कs मांजरा चैल आइब् रहल अइछ।जेकरे बकरीद ईद- उल- जूहा कs नाम सँ दुनिया जानैत अइछ।

मिथिला दैनिक क' समाचार ईमेल द्वारा प्राप्त करि :

Delivered by Mithila Dainik

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

 
#zbwid-2f8a1035