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एहिबेरक जन्माष्टमी खास अछि। 57वर्षकबाद ई ओहि समयमे पड़ल अछि, जेना लगभग  5,000 साल पूर्व द्वापरमे 'कृष्ण -जन्म'क समय छल ।मास,तिथि, दिन, नक्षत्र, चन्द्रमादिक स्थिति सभकिछु सद्यः ओहिने अछि ।

एहि बर्ख 'कृष्ण -जन्मोत्सव -पाबनि '  57वर्षकबाद आश्चर्यजनक सुखद-संयोगलऽ आयल अछि ।हुनक जन्म भाद्रपद  (भादो ) कृष्ण -पक्षक अष्टमी- तिथिकेँ बुधदिन, रोहिणी नक्षत्र आ वृषभ केर चन्द्रमाक स्थितिमे भेल छलनि।एहिबेरसँ पहिने एहन योग  1958मे  बनल छल आ 57वर्षकबाद एहन संयोग दोसरबेर आयल अछि ।

पंडितलोकनिक अनुसारें कृतिका नक्षत्रक काल-क्रम 9 घंटा 32मिनटकेर होइत छै। मान्यता छै कि भगवान कृष्णक जन्म अष्टमीक राति रोहिणी-नक्षत्रक आरम्भ कालक संयोगसँ भेलनि, एहिबेर रोहिणी-नक्षत्रक स्थितिमे मामूली अन्तर भेल अछि ।

हिन्दू-ग्रन्थ 'धर्म सिन्धु 'क अनुसार जे श्रद्धालु लोक दू दिनधरि व्रत करऽमे समर्थ नहि छी ओ अगिला दिन सूर्योदयक बाद ब्रत तोड़ि सकैत छी।

जन्माष्टमीक दिन श्री कृष्ण पूजा निशीथ-काल  (मध्य रात्रि )मे कयल जाइछ ।

मिथिलाक "विश्व विद्यालय -पंचांग"क हिसाबेँ कृष्णाष्टमीमे पूजालेल  24अगस्तक राति  12.54मिनटसँ  25अगस्तक राति  10.30मिनटधरि  अष्टमी अछि,ओहिठाम 'निशीथ-पूजा'क लेल रातिक  12बजएसँ  12.44  मिनटधरिक समय निर्धारित कयल गेल अछि।

अस्तु, श्री कृष्ण- जन्माष्टमीक शुभकामनाक संग--

जितमोहन झा (जितू) बनगाँव, सहरसा

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