खेती (बिहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम" - मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

खेती (बिहनि कथा) - वी०सी०झा"बमबम"

~ कि यउ उगन भाई सब दिन कऽ इ साइकिल पर कथि लदने जाइत रहैत छी ?

~ ओ कि कहि ? साइकिल पर बोरा मे खाद रहैत अछि !

~ आब खाद केर व्यवसाय प्रारंभ केलहुं अछि कि ? ओना नीक व्यवसाय अछि , किसान'क हितकर !

~ ऐंऽ यउ हम अहाँ कैंऽ बनियां देखाइत छी ? ऐंऽ हम निर्भूमि , हमर बाप पूरखा'क खेत पथार नहि अर्जल अछि कि ?

~ आब लिऽ - - उगन भाई अहाँ एतबहि बात पर एना तमसा गेलहु !

~ हयउ अहाँ'क गप्पे तेहन मरखाह होइत अछि ककरहुं तामस उठतहि कि ने ! जखन बुझैत छियहि जे खाद खेत मे दैइत छैइक तखन एना अर्थाऽ कैंऽ किआ पूछैत छियहि ?

~ परंच हम तऽ सोचलहुं जे एतेक खाद उगन भाई कि करताह ! ओतेक खाद थोरे ने खेत मे देथिन !

~ हयउ ! सूधरए पूत पिता केर.पिटनहि आ खेती उपजए यूरीया छिटनहि ! बूझलिएहि - - - अहाँ संग गलथोंथीं करब से हमरा पलिखति नहि अछि !

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