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२३ जुलाई:- बदरा घुरि फिरि एम्हरे आबय सबके मन ललचाबय ना 
कारी कारी मेघ देखा कय लोकक हिय हर्षाबय ना ।।
बादल लटकल बिजली छिटकल ठनका ठनके ना ,आहे सखी ठनका ठनके ना
पिरतम मोर भेल विदेशिया छाती धरकय ना 
बदरा घुरि फिरि एम्हरे आबय सबके मन ललचाबय ना ।।
कदमक गाछ पर सखि सब झूले रेशम डोरी ना, आहे सखी रेसम डोरी ना
मोर अभगला गेल नोकरिया कटबय अहुरिया ना
बदरा घुरि फिरि एम्हरे आबय सबके मन ललचाबय ना ।।
टिप टिप बदरी राति अन्हरिया कादो कीचड़ ना , आहे सखी कादो कीचड़ ना
मणिक इजोते सावन बीतय और भदवरिया ना
बदरा घुरि फिरि एम्हरे आबय सबके मन ललचाबय ना ।।
- मणिकांत झा, दरभंगा ।

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