बिहनि कथा (बाड़ी) - वी०सी०झा"बमबम" - मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

बिहनि कथा (बाड़ी) - वी०सी०झा"बमबम"

~ कने एक रत्ती चाहक पात बरकबितहु ! हे कने ठोर पकाउ ने

~ इ मनसा कोनो काज - राज करत नहि आ आँगन आयत तऽ देह डाहय बला गप सब करैत रहत !

~ हउ ने तमसाइत किआक छी एतेक ? नहि दूध मऽ हेतय तऽ कने बाड़ी बला कागजी नेबो गाड़ि देबय !

~ जाउ'क ने कने बारी , नेबो खायताह नेबो'क पात तऽ छूबहे नहि देतहि !

~ से किआ हमरहि रोपल नेबो आ हमरहि नहि तोरऽ देत ?
~ किआ'क तोरऽ देतैक अपन रहतै तखन ने तोरऽ देतहि ? रोपने कि गाछ भऽ जाइत छैइक ?

~ तखन हम पूछय छियैक हमर बाप - बाबा'क पुस्तैनी छी ओ बाड़ी तखन के नहि तोरऽ देतहि ?

~ दोसर के नहि तोरह देतहि ? दोसर कैऽ कोन काज छय ओहि संऽ ?

~ तखन के नहि एकरा बाड़ी जाय दैइत छैइक ?

~ आर के दियर - देआदनि ! कहैत छहि जे हम जे एतैक दिन संऽ घर मे खर्चा केलिएहि तकर बदला मे ओ बाड़ी लेलिएहि ! आ कहैत छलहि जखन ओहि पाय'क फाँट हमरा देत तखनहि हम बारी जाय देबैक अन्यथा नहि !

~ आ हम जे ओकरा पढ़ा - लिखा कऽ मनुख्ख मनेलिएहि से ?

~ तकर कोनो मान नहि ओ नगद खर्च केने छहि सझिया घर मे !

~ जाहि भाईयक खातिर खून - पसीना एक केलहु से भाई एहन भऽ गेेल ?

~ आओर काज राज छोड़ि कऽ दनाने - दनाने अपन भाई'यक बड़ाई छटने ने फिरउ - - - - -


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