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मात्रिभाषाक महत्व:-

कि अपने सब जनैत छी इ दैनीय जीवन में मात्रिभाषाक कतेक महत्व छैक....?

मात्रिभाषा अपन माएक भाषा थीक। इ माएक मुहं सऽ बाजल जाए वाला भाषा अछि। एकरा हमसब अपन माएक मुहं सऽ सीखैत छी। इ भाषा बहुत मीठ होइत अछि, इ बजिते जेना लगैत छैक जे मुहं सऽ मोध चुबि रहल अछि। बच्चाक जन्म लैत देरिक धीरे-धीरे ओ अपन माएक बात बुझि-समझ ओ बजबाक लेल कोशिश करैत छैक आ धीरे-धीरे बाजए लागति अछि। ओना आए-काइल बच्चाक माएक सब अपनैक बहुत काबिल बुझि बच्चाक मात्रिभाषा सिखेबाक सऽ बंचित रखैत छैथ जे कि कतेक गलत करैत छैथ आ ओ बुझैत छैथ यदि हमर बच्चा इ भाषा बाजए लागल आ यदि हम गाम जायब तऽ ओहि ठाम इ भाषा बाजत तऽ ओतिका लोकसब कि कहत....??? तैं अपन बच्चा सबकें जन्म लैत देरिक पति-पत्नि दुनु गोटे हिन्दी आ अलग-अलग भाषा में बजनाए शुरु करैत छथि जाहि कऽ कारण हुनकर बच्चा सबपर एहि कऽ प्रभाव पडति छैन आ ओ बच्चा अपन माएक भाषा सऽ बंचित रहि जाएत छथि।

मुदा जखन ओ बच्चा बडा होइत अछि, तऽ ओ अपन माए सऽ पुछति छैथ:-

"मम्मी हमलोगों का मदरलेग्वेंज क्या हैं?"

एहि प्रश्नक जवाब दैत छैथ:-

"बेटा हमलोगों का वैसे मैथिली हैं।"

फेर ओ पुछति अछि:-

"तो मम्मी मेरेको ये भाषा क्यो नहीं सिखायी क्योंकि मदरलेग्वेंज में एक अलग सा मिठास रह्ता है, जिसके कारण इसको बोलने में अच्छा लगता हैं।"

बच्चाक मम्मी कहैत छथि:-

"बेटा मैथिली भाषा का कोई महत्व नहीं और जिस भाषा का महत्व नही हो या जिस भाषा को बोलने से कोई लाभ ना हो, वह भाषा बोलकर और सीखकर क्या करोगे....????"

मुदा ओ छोडा के संतुष्टी नहीं मिलति छैक, फेर ओ पुछति अछि:-

"तो मम्मी इतने आदमी अपनी-अपनी मात्रिभाषा क्यो बोलते हैं?"

एहि पर जवाब दैत छथि:-

"लोगों की अपनी-अपनी सोच-समझ हैं, लेकिन ये भाषा बोलने से कुछ नही होने वाला हैं।"

मुदा ओहि "मम्मी" कऽ इ नहि बुझल छैन:-
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मुल...।
बिन निज भाषा ग्यान के, मिटे ना भ्रम को शुल..॥

इ भाषा एहेन अछि जाहि कऽ आधार पर कतेको राज्य अलग भए गेल, जेना कि मराठी सऽ महराष्ट्र, कन्नड सऽ कर्नाटक, गुजराती सऽ गुजरात, तमिल सऽ तमिलनाडु, पंजाबी सऽ पंजाब आरो बहुत रास भाषाक आधार पर राज्य विजाभित भऽ चुकल अछि आ हाले में एकटा औरो भेल जे अछि:- तेलगु सऽ तेलंगाना।

कहैय कऽ माने अछि मात्रिभाषाक एतेक महत्व अछि जाहि कऽ कारण केतेको राज्य विभाजित भेल। मुदा हमरा सबकें मैथिली बजबा मे कोन चीजक लाज अछि, कियैक नहि मैथिली बाजैत छी, आ कियैक बहुते लोकैन कऽ एहेन सोच अछि जाहि कऽ कारण हुनकर धिया-पुता एहि भाषा सऽ सौ कोस दुर रहति अछि........??????

अपनैक एहि सोचक चलते इ मिथिला सौ कोस दुर चलि रहल अछि, यौ एखन तऽ विनडोंज ८ कऽ जमाना छैक, कियैक अपने लाइनेक्स पर चलि रहल छी। अपन सोच कऽ ऊचं करु ने, तखने कोनो भी राज्य विकासक लेल अग्रसर होइत..........अपन मात्रिभाषा क नहि छोडि, इ तऽ शुद्ध आक्सीजन कऽ काम करैत अछि, एकरा कोना अपने बिसरि रहल छी....जुनि बिसरि नहि तऽ अपनैक पहचान मेट जाइत। एहि पहचान कऽ जिंदा राखु तखने अपनैक पहचान कयल जाइत नहि तऽ अपने कऽ कहल जाइत.........

"बाजु अपने कोन ठाम सऽ छी, टेल मी वेयर आर यु फ़रम....आ आदि-आदि"


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