0

हमर मिथिलाक माटिसँ सोन उपजैए
कऽलसँ बनि पानि अमृत धार निकलैए 

सगर पोखरिक छह छह पानिमे गामक
रुपैया बनि मखानसँ माछ गमकैए

घरे घर सभ छटैए बड्ड बुधियारी
दलानसँ राजनीतिक जैड़ जनमैए

युवाकेँ हाथ बल छै ओ बढ़त आँगा
जँ लेलै ठानि छनमे चान पकरैए

अपन माटिसँ भएलहुँ दूर ‘मनु’ कोना
विरहमे हमर आँखिसँ नोर झहरैए

(बहरे हजज, मात्रा क्रम- १२२२-१२२२-१२२२)

मिथिला दैनिक क' समाचार ईमेल द्वारा प्राप्त करि :

Delivered by Mithila Dainik

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

 
#zbwid-2f8a1035